काम पर गए व्यक्ति को चार लोगों ने उठाया, यातना दी और नशीले पदार्थों के व्यापार के झूठे आरोप लगाने का दबाव बनाया।

पठानकोट, पंजाब: गाँव जंगलाँ के एक राजमिस्त्री (मिस्त्री) कुलदीप सिंह (साबू) को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और बेरहमी से पीटा गया। कुलदीप सिंह और उनके परिवार ने आज पठानकोट के एसएसपी (सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) दफ्तर पहुँचकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित कुलदीप सिंह ने बताया कि वह जंगलाँ गाँव में पहले दिन डीपीसी डालने के काम पर गए थे। दोपहर 3 बजकर 10 मिनट के आसपास, एक व्यक्ति ने उन्हें चाय पीने के बहाने बुलाया, जिसके बाद चार लोग—तीन मोंने और एक सरदार—उन्हें पकड़कर ले गए।
उत्पीड़न के आरोप: कुलदीप सिंह के अनुसार, उन लोगों ने उन्हें धमकी दी और बार-बार पूछा कि क्या वह ‘फीम’ (अफीम/नशीले पदार्थ) बेचते हैं। उन्होंने उन पर स्थानीय युवकों के नाम लेने के लिए दबाव बनाया जो कथित तौर पर नशीले पदार्थों का व्यापार करते हैं।
मारपीट और यातना: कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें कमरे के अंदर ले जाकर लाठियों से पीटा गया और उनके हाथ-पैर तोड़ दिए गए। उन्होंने बताया कि उनके होंठ से खून भी बह रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके माता-पिता को गाली दी और उनकी ‘मरी हुई माँ’ तक को अपशब्द कहे।

स्थान और स्थिति: मारपीट करने वालों ने कथित तौर पर अपनी गाड़ी कैमरे की पहुँच से दूर खड़ी की थी। कुलदीप सिंह को बाद में एक जगह पर कैमरे के सामने ‘लेटने’ के लिए भी कहा गया। मारपीट करने वाले सरदार का किसी को फ़ोन आया था, जो कथित तौर पर इन सब का निर्देश दे रहा था।
छोड़ना: पिटाई के बाद, हमलावरों ने कुलदीप सिंह से अपने घर वालों से बात करने और घर जाने को कहा, लेकिन उन्होंने किसी की भी बात नहीं सुनी।
परिवार और समर्थन का पक्ष
कुलदीप सिंह की पत्नी ने बताया कि उन्हें लगा कि यह सब “अवैध तरीके से किया गया”। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसी भी तरह के आपराधिक काम में शामिल नहीं हैं और केवल न्याय चाहते हैं।
उनके साथ आई एक महिला ने बताया कि यह पूरा मामला परसों उनके संज्ञान में आया था।
राजनीतिक हस्तक्षेप: ग्रामीणों ने सुबह अपने प्रधान श्री अश्विनी शर्मा से मुलाकात की, जिन्होंने बाद में एसएसपी और एसपी हेडक्वार्टर से बात की।
जांच की मांग: महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी, जैसे एसएचओ मान साहब, को भी कुलदीप सिंह का पूरा नाम पता नहीं था। उन्होंने कहा कि यह घटना “दिये तले अंधेरा” जैसी है, क्योंकि जो लोग शरेआम (खुलेआम) चिट्टा (नशा) बेच रहे हैं, उन्हें पुलिस नहीं पकड़ रही।

शिकायत: परिवार और ग्रामीणों ने मांग की है कि कुलदीप सिंह को न्याय मिले और जिन लोगों ने यह घटना करवाई है, उन दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा दी जाए। एसपी हेडक्वार्टर ने मामले की पूरी जाँच पड़ताल करने और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
कुलदीप सिंह और उनके परिवार का कहना है कि वे केवल अपनी मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं और उनके गाँव के किसी व्यक्ति ने शरारतबाज़ी करके उन्हें फंसाया है।








