NEET विवाद: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला, दिया इस्तीफा
जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध और विपक्ष के दबाव के बीच लिया फैसला; तीसरे दौर की बातचीत से ठीक पहले आया इस्तीफा
नई दिल्ली: NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रदर्शनों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दलों के बढ़ते दबाव के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
विशेष बात यह रही कि सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होने वाली थी, लेकिन उससे ठीक पहले ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आ गई। इस्तीफे की घोषणा होते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया पर इस्तीफे का किया ऐलान
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा:
“मेरे युवा दोस्तों, मैं चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहा हूँ। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और जायज अपेक्षाओं का दिल से सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को पूरा करना हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में एक नैतिक प्रतिबद्धता रही है। मैं प्रधानमंत्री का उनकी दूरदर्शी अगुवाई में देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद करता हूँ।”
NEET परीक्षा में धांधली और उठाए गए कदम
अपने बयान में उन्होंने 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- CBI जांच और रद्दीकरण: धांधली सामने आते ही भारत सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया, मामले की जांच CBI को सौंपी और परीक्षा रद्द कर नई तारीख का ऐलान किया।
- CBT मोड लागू: भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए अगले साल से परीक्षा को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का फैसला लिया गया।
- 21 जून की परीक्षा: सरकार, राज्य प्रशासन और माता-पिता के सहयोग से 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए 21 जून, 2026 को पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक कराई गई।
- 16 जुलाई का परिणाम: 16 जुलाई को घोषित परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें कई गरीब और मेधावी छात्रों ने सफलता प्राप्त की।
”युवा शक्ति को भ्रम के चक्रव्यूह से बचाना मकसद”
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में विरोध की राजनीति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिम्मेदारी के पदों पर बैठे कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर में बन रहे माहौल का राष्ट्रविरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी पचड़ों में न फंसे, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने जगन्नाथ स्वामी के आशीर्वाद से ओडिशा के लोगों और देश के युवाओं की सेवा आगे भी करते रहने का संकल्प दोहराया।










