नीट यूजी विवाद: चौतरफा घिरे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
अतीत का चक्र: 1997 में जिस पेपर लीक के खिलाफ सही थी लाठी, उसी मुद्दे पर 29 साल बाद गंवानी पड़ी कुर्सी
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक विवाद, रद्द हुई परीक्षाओं और देश भर में छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठते सवालों के बीच उनका यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिस नेता ने 1997 में छात्र संघ नेता के रूप में परीक्षा पत्र लीक के खिलाफ सड़कों पर लाठीचार्ज सहा था, 29 साल बाद नियति ने उन्हें उसी मुद्दे पर देश के शिक्षा मंत्री के रूप में इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
‘पेपर लीक के दशक’ से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
धर्मेंद्र प्रधान के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत 1990 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई थी।
- 1997 का विधानसभा प्रदर्शन: जुलाई 1997 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान 12वीं के पर्चे लीक होने के विरोध में ओडिशा विधानसभा के बाहर एक बड़ा आंदोलन हुआ था। ABVP के राष्ट्रीय सचिव के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था।
- लाठीचार्ज में हुए थे घायल: प्रदर्शन को तितर-बितर करने के लिए हुई पुलिसिया कार्रवाई में धर्मेंद्र प्रधान समेत 64 कार्यकर्ता घायल होकर अस्पताल पहुंचे थे। 1988 से 1997 के इस दौर को छात्र ‘प्रश्नपत्र लीक का दशक’ कहते थे।
- समय की विडंबना: करीब तीन दशक बाद स्थितियां उलट गईं। नीट-यूजी और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में हुई धांधली के आरोपों के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर खुद धर्मेंद्र प्रधान आ गए।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक: राजनीतिक सफर पर एक नज़र
26 जून 1969 को तालचेर (ओडिशा) में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान का परिवार पहले से ही राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता डॉ. देबेंद्र प्रधान ओडिशा भाजपा के संस्थापकों में से एक थे।
राजनीतिक सफरनामा:
- 2000: पाललहड़ा से पहली बार विधायक बने (BJD-BJP गठबंधन)
- 2001: ओडिशा बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष
- 2002: भाजपा के राष्ट्रीय सचिव
- 2004: BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं देवगढ़ से सांसद
- 2012: राज्यसभा सदस्य चुने गए
- 2024: 18वीं लोकसभा में पुनः सांसद निर्वाचित
मोदी सरकार में अहम जिम्मेदारियां और उपलब्धियां
2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान लगातार प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभालते रहे:
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (2014-2021):
- देश में सबसे लंबे समय तक पेट्रोलियम मंत्री रहने का रिकॉर्ड।
- प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सफल क्रियान्वयन का श्रेय, जिसने करोड़ों गरीब परिवारों तक एलपीजी कनेक्शन पहुंचाया।
- शिक्षा तथा कौशल विकास मंत्रालय (2021-2026):
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को धरातल पर लागू कराने में प्रमुख भूमिका।
- शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सुधारों को गति दी।
- ओडिशा भाजपा के शिल्पकार: 2024 में ओडिशा में पहली बार भाजपा की सरकार बनाने में उनकी रणनीतिक भूमिका को अहम माना जाता है।
विवादों के घेरे में शिक्षा मंत्रालय
हालिया महीनों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर उठते सवालों ने मंत्रालय की साख पर गहरा असर डाला:
- NEET-UG पेपर लीक: परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता पर उठे गंभीर प्रश्न।
- UGC-NET रद्द: परीक्षा में अनियमितता की आशंका के चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
- पारदर्शिता पर सवाल: प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के चलते छात्रों और अभिभावकों का भरोसा टूटा, जिसके चलते भारी राजनीतिक दबाव के बीच अंततः उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।










