कम मानसून के बाद अब ‘सुपर एल नीनो’ का खतरा: देश में गर्म सर्दियों, भीषण गर्मी और गंभीर जल संकट के आसार
इस साल मानसून के दौरान देश में सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके बाद अब भारत में गर्म सर्दियों और आने वाले समय में भीषण गर्मी का खतरा मंडराने लगा है।
मौसम वैज्ञानिकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो और अधिक मजबूत हो सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ सकता है। जब यह स्थिति बहुत अधिक मजबूत होती है तो इसे ‘सुपर एल नीनो’ कहा जाता है। हालांकि यह मौसम विज्ञान में कोई आधिकारिक श्रेणी नहीं है और इसकी सटीक तीव्रता के बारे में अभी कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसके संभावित प्रभाव बेहद गंभीर हो सकते हैं। इस स्थिति के परिणामस्वरूप आने वाली सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहने, पहाड़ी इलाकों में कम बर्फबारी होने और गर्मियों के दौरान भीषण लू (हीटवेव) चलने की संभावना जताई जा रही है।
मानसून सीज़न के दौरान कम बारिश होने के कारण देश के जलाशयों, भूजल स्तर और मिट्टी की नमी पर भारी दबाव पड़ा है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पानी के भंडार घटने के जवाब में स्थानीय अधिकारियों ने जलापूर्ति में कटौती जैसे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और देशभर की सरकारें भी इस संभावित जल संकट पर नजर बनाए हुए हैं। यदि सर्दियों के मौसम में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। इसका सीधा असर रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं के विकास और कुल पैदावार पर पड़ेगा। बढ़ते तापमान के कारण फसलों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता होगी, जबकि जल स्रोतों में सीमित पानी की उपलब्धता किसानों की समस्याओं को काफी बढ़ा सकती है। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में कम बर्फबारी से नदियों और अन्य जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो बर्फ पिघलने पर निर्भर करते हैं।











