हिमाचल प्रदेश को पर्यटन हब बनाने की तैयारी: अगले 5 वर्षों में होगा 15 हजार करोड़ का निवेश
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के पर्यटन क्षेत्र को एक नई पहचान देने और आर्थिक समृद्धि को गति देने के लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की योजना बना रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में हाई-एंड यानी महंगे पर्यटन को बढ़ावा देना, बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करना और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। शिमला जिले के ऐतिहासिक नालदेहरा गोल्फ कोर्स में आयोजित दो दिवसीय ‘कोटी गोल्फ कप-2026’ के समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के दम पर सरकार प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
राज्य में एयर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए सरकार विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर ही लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, उड़ान संचालन को सुचारू बनाए रखने और वित्तीय सहायता देने के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ तंत्र के तहत 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट सुविधाओं से जोड़ना है, ताकि दूर-दराज के इलाकों तक पर्यटकों की पहुंच आसान हो सके। वहीं, शिमला से नियमित कनेक्टिंग उड़ानें शुरू करने के प्रयास भी अंतिम चरण में हैं। कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार से बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी, जिससे पर्यटकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इको-टूरिज्म पर भी बड़ा दांव खेला है। प्रदेश में 60 इको-टूरिज्म स्थलों को लीज पर दिया गया है, जिससे राज्य के खजाने को 22 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नालदेहरा गोल्फ कोर्स के सौंदर्यीकरण और विकास पर 1.82 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स को अब आम पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है और इसे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के निरंतर प्रयास जारी हैं।










