प्रशासन की नींद कब टूटेगी? मंड भोगरवां में अवैध माइनिंग का काला खेल जारी
प्रशासन की नींद कब टूटेगी? आखिर नुरपूर से लेकर मंड भोगरवां तक धड़ल्ले से जारी है अवैध माइनिंग का यह खेल. व्यास नदी पर बने पुल के दोनों छोर बहने के बाद भी नहीं जागा माइनिंग विभाग.
अगर हम आज बात करें नुरपूर जिला पुलिस की, तो इसके अंतर्गत आते खन्नी पंचायत के ब्राह्मणा दा नाल, बिल्ला दा टाल और वहीं अगर हम बात करें डमटाल की तो वहां पे माजरा इलाका, रामगोपाल मंदिर और इसके आगे भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ पर माइनिंग आज भी धड़ल्ले से जारी है. हम कई खबरें दिखा चुके हैं परंतु पुलिस विभाग और माइनिंग विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती और आज तक सिर्फ दो-एक नाम मात्र रेड करने के अलावा जो माइनिंग पिछले दो महीने से लगातार जारी है, उसके ऊपर कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया.
अगर हम आज बात करें मंड भोगरवां की, जो नुरपूर के अंतर्गत आता है, तो वहां अगर आपको याद हो तो 2025 में वहां इतनी बाढ़ आई थी कि सारे गांवों में पानी-पानी हो गया था, जिसका असर हमें बाकी के कई गांवों में भी देखने को मिला था.
उसका मुख्य कारण 2025 में आई वह बाढ़ थी और गांवों में पानी आने का कारण वहां पर अवैध माइनिंग थी. उसी अवैध माइनिंग के चलते मंड भोगरवां में जो व्यास नदी के ऊपर पुल है, वह दोनों तरफ से बह गया था. आज भी वहां जो पुल है, वह पुल तो है पर दोनों साइड्स से गायब है, तो इसका यह भी जो कारण था वह अवैध माइनिंग बताया जाता है. हैरानी की बात यह है कि वह अवैध माइनिंग जिसके कारण इतना नुकसान हुआ, पुल बह गया, लोगों के घरों में पानी आ गया, लोगों के जनजीवन पर बन आई, कई पशु बह गए, कई घर बह गए और आज भी वहां अवैध माइनिंग धड़ल्ले से जारी है. जिसकी जीती जागती तस्वीर हम आपको दिखा रहे हैं, जरा ध्यान से देखिए मंड भोगरवां के यह विजुअल्स, यह सामने देखिए जेसीबी लगी हैं और माइनिंग चल रही है,











