‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ISI की नई चाल: आतंकी संगठनों में अब पूर्व पाकिस्तानी सैनिकों की हो रही है भर्ती
- जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को प्रशिक्षित आतंकवादियों की भारी कमी का करना पड़ रहा सामना
- नए रंगरूटों की लंबी ट्रेनिंग से बचने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने बदली रणनीति
नई दिल्ली/इस्लामाबाद:भारत के आक्रामक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में कई प्रमुख आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूद हो चुके हैं। इस बड़ी कार्रवाई से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों को प्रशिक्षित आतंकवादियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस खालीपन को भरने और भारत के खिलाफ अपनी नापाक गतिविधियों को तेज करने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
ट्रेनिंग के समय को बचाने की साजिश
खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, नए रंगरूटों को लंबी और जटिल ट्रेनिंग देने में होने वाली देरी से बचने के लिए ISI ने अब एक नया पैंतरा अपनाया है। अब आतंकी संगठनों में सीधे तौर पर सेवानिवृत्त (Retired) पाकिस्तानी सेना और नौसेना के जवानों को भर्ती किया जा रहा है, ताकि उन्हें युद्ध और हथियारों का पहले से प्राप्त अनुभव तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।
पाकिस्तानी सेना दे रही है खुला समर्थन
सिर्फ भर्ती ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना इन आतंकवादियों को हर मुमकिन सहायता मुहैया करा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाक सेना इन पूर्व सैनिकों और आतंकियों को:
- घुसपैठ: भारी सुरक्षा के बीच भारतीय सीमा में घुसपैठ करवाने,
- लॉजिस्टिक्स और हथियार: आधुनिक हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने,
- नशा तस्करी: हथियारों के साथ-साथ ड्रग्स की तस्करी के जरिए फंडिंग जुटाने, और
- वित्तीय मदद: आतंकी नेटवर्क को जिंदा रखने के लिए भरपूर आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
ISI का यह षड्यंत्र साफ तौर पर यह दर्शाता है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों और भारत की सख्त कार्रवाई के बावजूद पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और आतंकी हमले जारी रखने की अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां दुश्मन के इस नए नापाक मंसूब्रे को नाकाम करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।











