निरकारी भवन के सामने एनएच-154 पर तीन मंजिला निर्माण पर उठे सवाल, टीएमटीएस योजना की जमीन पर बिना स्पष्ट नक्शे के हो रहा है काम
पठानकोट में एनएच-154 पर निरकारी भवन के सामने जेसीबी एजेंसी के साथ एक तीन मंजिला इमारत का निर्माण तेजी से चल रहा है। यह जमीन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की टीएमटीएस योजना के अंतर्गत आती है। एएमआई न्यूज का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरटीआई के जवाब से पहले काम रोकने में ढिलाई क्यों बरती जा रही है और इस इमारत का स्वीकृत नक्शा कहां है तथा इसे किस अधिकारी ने मंजूरी दी है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि साथ वाली इमारत का निर्माण वर्षों से बंद है और उससे जुड़े अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच चलने की जानकारी सामने आई है।
मौजूदा जानकारी के अनुसार यह जमीन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की टीएमटीएस योजना का हिस्सा है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की किसी एनओसी का न होने का है, बल्कि ट्रस्ट के संवीकृत भवन नक्शे को लेकर है। ट्रस्ट के अधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इस तीन मंजिला इमारत का नक्शा ट्रस्ट के पास है या उन्होंने इसे पास किया है। यदि हां, तो उसकी प्रति और मंजूरी की शर्तें सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही हैं।
इसके साथ ही सटी हुई इमारत का निर्माण कई सालों से बंद पड़ा है। जानकारी के अनुसार जिस दौर में इसका निर्माण शुरू हुआ था, उस समय के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आज भी चल रही है, ऐसे में उसी जगह के पास नया निर्माण किस अनुमति और कैसे आगे बढ़ रहा है? दूसरा सवाल इमारत के रुख का है, क्योंकि इस योजना में वैध निर्माण का प्रवेश मुख्य कॉलोनी की तरफ होना चाहिए न कि एनएच-154 की तरफ। यदि ट्रस्ट ने हाईवे की ओर मुख रखने की अनुमति दी है, तो वह किस संवीकृत योजना या आदेश के आधार पर दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के अधिकारी निर्माण स्थल पर जा चुके हैं और निर्माण कराने वाले व्यक्ति को कार्यालय भी बुला चुके हैं, इसके बावजूद काम निरंतर जारी है। ऐसे में निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने क्या रिपोर्ट बनाई और क्या कार्रवाई की, यह जानना भी आवश्यक है। इस मामले में एक एनओसी का जिक्र भी सामने आ रहा है, लेकिन संपत्ति की खरीद-फरोख्त या नामांतरण से जुड़ी एनओसी और भवन निर्माण के संवीकृत नक्शे को एक नहीं माना जा सकता। यदि अधिकारी किसी एनओसी का हवाला दे रहे हैं, तो उन्हें बताना होगा कि वह एनओसी किस उद्देश्य से जारी हुई थी और क्या उससे तीन मंजिला निर्माण व हाईवे की तरफ प्रवेश की अनुमति मिलती है।
एएमआई न्यूज ने आरटीआई के जरिए ट्रस्ट से विशेष रूप से उस एनओसी की प्रति मांगी है, जिसके आधार पर कथित तौर पर नगर निगम से नक्शा पास करवाने की बात कही जा रही है। ट्रस्ट ने जवाब के लिए निर्धारित समय का हवाला दिया है, लेकिन कानून में जवाब देने के लिए सामान्यतः 30 दिन का समय होने के बावजूद उस अवधि में निर्माण की वैधता जांचने और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने से अधिकारियों को किसने रोका है, यह सबसे बड़ा सवाल है।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन और इंजीनियरिंग शाखा से सीधे सवाल किए गए हैं कि इस निर्माण का संवीकृत नक्शा कहां है, स्थल निरीक्षण में क्या पाया गया, हाईवे की तरफ मुख की अनुमति किसने दी और अगर मंजूरी नहीं है तो निर्माण अब तक क्यों नहीं रोका गया। एएमआई न्यूज इस मामले में ट्रस्ट, नगर निगम और निर्माण कराने वाले पक्ष का पक्ष भी सामने रखेगा, ताकि नियमों के पालन या अनदेखी की पूरी सच्चाई सामने आ सके।












