शालीमार बाग में मैक्स हॉस्पिटल रोड पर अवैध निर्माण पर गरमाया माहौल; मदीना मस्जिद के हिस्से पर चली बुलडोजर की कार्रवाई
- प्रशासन का दावा: सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक जाम से निजात पाने के लिए की गई कार्रवाई
- स्थानीय लोगों और विपक्ष ने उठाया सवाल; AIMIM नेता शोएब जमाई ने रात के समय की गई कार्रवाई पर जताई आपत्ति
नई दिल्ली:राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मैक्स हॉस्पिटल रोड पर उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई जब सिविक अधिकारियों ने भारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की मौजूदगी में देर रात अतिक्रमण हटाने का एक बड़ा अभियान चलाया। इस दौरान सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के तहत मदीना मस्जिद और उससे जुड़ी कुछ अन्य इमारतों के ऊपरी हिस्सों को बुलडोजर से गिरा दिया गया।
सड़क चौड़ीकरण का आधिकारिक प्रोजेक्ट
नगर निगम (MCD) के अधिकारियों के अनुसार, यह तोड़-फोड़ अभियान सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य से चलाया गया था। प्रशासन का कहना है कि जिन ढांचों को हटाया गया, वे सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे के दायरे में आते थे। कार्रवाई के दौरान मौके पर कई बुलडोजर, डंपर और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
मस्जिद प्रशासन और स्थानीय लोगों के आरोप
लगभग 30 साल पुरानी मदीना मस्जिद के अध्यक्ष मोविन खान ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला अभी अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) और अदालत में विचाराधीन था। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद प्रबंधन ने नोटिसों के जवाब और संबंधित दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन बिना किसी स्पष्ट पूर्व सूचना के अचानक यह कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मस्जिद के इमाम जरीफुर रहमान ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की अन्य संपत्तियों की तरह ही इस मस्जिद के पास भी वैध दस्तावेज और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े आधार थे, इसके बावजूद केवल मस्जिद को ही निशाना बनाया गया। स्थानीय लोगों का यह भी कहना था कि उन्हें पवित्र कुरान और जरूरी सामान बाहर निकालने का भी पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
राजनीतिक हलचल और विरोध प्रदर्शन
देर रात हुई इस तोड़-फोड़ की कार्रवाई के बाद मौके पर भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रतिनिधि और प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमाई मौके पर पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि अंधेरे में और पूरी गोपनीयता के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्थानीय लोग और विपक्ष के नेता शांतिपूर्ण तरीके से बात करना चाहते थे, तो उन्हें रोका क्यों गया।
चूंकि शालीमार बाग वह विधानसभा क्षेत्र है जिसका प्रतिनिधित्व दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करती हैं, इसलिए इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय राजनीति और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।











