विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यूएनजीए में कूटनीतिक सक्रियता: बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर जोर और V4 देशों के साथ नई साझेदारी का आगाज
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क:संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया है। वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते तनाव के बीच उन्होंने बहुपक्षवाद पर आयोजित पहले शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए अधिक भागीदारी, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान यूरोपीय संघ के समकक्षों तथा मध्य यूरोप के चार देशों के विसेग्राद (V4) समूह के साथ हुई बैठकों में भारत-यूरोप सहयोग, व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक संकटों पर व्यापक चर्चा हुई।
UN में गूंजी भारत की आवाज, बहुपक्षवाद और सुधारों पर जोर
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक व्यवस्था भारी दबाव में है। तीव्र प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को मजबूत करना समय की मांग है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुपक्षवाद को प्रभावी बनाने के लिए अधिक भागीदारी वाली विचार-विमर्श प्रक्रिया और पारदर्शी निर्णय व्यवस्था बेहद जरूरी है। जयशंकर ने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, आतंकवाद से मुकाबले, जलवायु कार्रवाई, उभरती प्रौद्योगिकियों, विकास वित्त, आपदा प्रबंधन और महामारी की तैयारी जैसे गंभीर मुद्दों पर सामूहिक प्रयास का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पालन करना ही बहुपक्षवाद को मजबूती देने की असली बुनियाद है। इस सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, केन्याई राष्ट्रपति विलियम रूटो, बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली समेत कई प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
V4 देशों के साथ भारत का नया ऐतिहासिक सहयोग
यात्रा के दौरान भारत और मध्य यूरोप के चार देशों—चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया (V4 समूह)—के विदेश मंत्रियों की पहली ऐतिहासिक बैठक हुई, जिसे जयशंकर ने एक ‘नया ऐतिहासिक अवसर’ करार दिया। बैठक में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष, अंतरिक्ष, संपर्क और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर पूर्ण सहमति बनी।
भारत और V4 देशों ने भविष्य में विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक तथा एक वार्षिक व्यापार मंच की शुरुआत करने का फैसला किया है। इसके अलावा, रक्षा सहयोग को पुनर्जीवित करने और तकनीक, अनुसंधान तथा शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के एजेंडे में यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के ताजा घटनाक्रम जैसे प्रमुख वैश्विक मुद्दे भी शामिल रहे।
यूरोपीय संघ और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें
विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-ईयू सहयोग, बहुपक्षीय मुद्दों तथा खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन और हिंद-प्रशांत से जुड़े मौजूदा घटनाक्रमों पर गहन चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार गहरा हो रहा है और विभिन्न क्षेत्रों में इसे आगे बढ़ाने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
इसके अलावा, उन्होंने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी भेंट की और आश्वस्त किया कि भारत नाउरू के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता पूरी निष्ठा से जारी रखेगा। कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र के दौरान विदेश मंत्री की बैठकों का केंद्रबिंदु बहुपक्षवाद, यूरोप के साथ रणनीतिक और आर्थिक सहयोग, मजबूत रक्षा-प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा यूक्रेन व खाड़ी क्षेत्र जैसे ज्वलंत वैश्विक संकट रहे।











