भारत को 2029 तक पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का संकल्प: केंद्र सरकार ने जारी किया 3 साल का व्यापक रोडमैप
केंद्र सरकार ने साल 2029 तक भारत को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए 2026-29 का तीन साल का समयबद्ध रोडमैप तैयार किया गया है। इस विजन दस्तावेज को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 26 जून 2026 को एनसीओआरडी की 10वीं एपैक्स कमेटी की बैठक के दौरान जारी किया गया था। शिमला में आयोजित एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान पीआईबी के अतिरिक्त निदेशक जनरल राज कुमार और एनसीबी के उत्तर जोन के निदेशक अमनजीत सिंह ने इस योजना का खुलासा करते हुए बताया कि इसमें 4 मुख्य स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स शामिल किए गए हैं।
इस रोडमैप के पहले नेटवर्क-केंद्रित स्तंभ के तहत खुफिया और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई करते हुए नशा तस्करों की संपत्तियों को जब्त करने और 2029 तक विदेशों से ड्रग्स तस्करी चला रहे 100 प्रमुख भगोड़ों को भारत वापस लाने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे स्तंभ के जरिए सिंथेटिक और केमिकल ड्रग्स पर शिकंजा कसते हुए अवैध प्रयोगशालाओं को नेस्तनाबूद किया जाएगा तथा प्रीकर्सर केमिकल्स की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर खपत तक 100% डिजिटल निगरानी सुनिश्चित होगी। तीसरे स्तंभ के तहत आम जनता में जागरूकता बढ़ाने और पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, चौथे स्तंभ के तहत मार्च 2027 तक हर राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन और 30 दिनों के भीतर फोरेंसिक रिपोर्ट उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ‘सुरक्षित क्षेत्र’ के रूप में चिन्हित किया जाएगा और एनसीसी, एनएसएस तथा माई भारत प्लेटफॉर्म के माध्यम से 1 लाख ‘नशा मुक्त मित्र’ तैयार किए जाएंगे। राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली एनसीओआरडी के तंत्र के तहत पंचकूला में अंतर-राज्यीय ड्रग सचिवालय पहले से ही कार्यरत है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कड़े कदमों के चलते 2004-2013 की तुलना में हाल के वर्षों में जब्त किए गए नशों की मात्रा में 4.6 गुना, उनके मूल्य में 4.7 गुना और नष्ट किए गए नशों की मात्रा में 14.4 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।











