शिमला पहाड़ी पार्क: बदहाली, नशा और लापरवाही की लाइव तस्वीर (पठनकोट की ऐतिहासिक धरोहर की दुर्दशा)
पठनकोट का सबसे पुराना और ऐतिहासिक ‘शिमला पहाड़ी’ पार्क आज अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। प्रकृति की गोद में बसा यह पार्क कभी दूर-दूर से आने वाले सैलानियों और परिवारों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र हुआ करता था, लेकिन वर्तमान में यह प्रशासनिक लापरवाही, नशे और असामाजिक तत्वों का मुख्य गढ़ बन चुका है। नगर निगम डिवीजन 1 कार्यालय के बेहद करीब स्थित होने के बावजूद इस ऐतिहासिक पार्क की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कई संस्थाएं इसकी देखरेख का दावा तो करती हैं, पर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
पार्क के भीतर वर्तमान स्थिति यह है कि स्कूली बच्चे अपनी यूनिफॉर्म में स्कूल से बंक मारकर यहां अड्डा जमा रहे हैं, फोन चला रहे हैं और खेल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही यह पार्क जुआरियों और नशेड़ियों के कब्जे में चला जाता है। यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसके कारण अब आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए इस क्षेत्र में आना पूरी तरह से असुरक्षित हो गया है। बच्चों के इस तरह स्कूल से बंक मारकर यहां समय बिताना उनके भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि पार्क के अंदर न तो साफ-सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही रख-रखाव पर ध्यान दिया जा रहा है। यहां के पौधे और झाड़ियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि उनके बीच सांप जैसे जहरीले और खतरनाक रेप्टाइल्स के छिपे होने का खतरा लगातार बना रहता है। इसके अलावा, पार्क में स्थापित किए गए झूले और बेंच पूरी तरह टूट चुके हैं और जंगलों की तरह फैल चुकी घास के कारण यहां आना किसी बड़े खतरे को न्योता देने जैसा है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि इस पार्क में देश के शहीदों की याद में एक स्मारक भी बनाया गया है, जहां ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ और शहीदों के नाम लिखे गए हैं। लेकिन देखरेख के अभाव में उस पवित्र स्मारक के आसपास भी भारी गंदगी और जंगली घास उग आई है, जो हमारे शहीदों के प्रति घोर लापरवाही और अनादर को दर्शाती है। स्थानीय बुजुर्गों और नागरिकों का कहना है कि वे कई बार इस मुद्दे को देख चुके हैं और यह समस्या पिछले कई सालों से लगातार बद से बदतर होती जा रही है, परंतु नगर निगम के अधिकारी अपनी कुर्सियों और एसी कमरों से बाहर निकलकर इस तरफ ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
पठनकोट की इस अमूल्य धरोहर को बचाने के लिए अब स्थानीय लोगों और मीडिया ने आवाज़ उठानी शुरू कर दी है। जनता का यही कहना है कि यदि समय रहते नगर निगम ने इस पार्क में स्थायी ड्यूटी और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं की, तो कोई बड़ा हादसा होना तय है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस खबर के बाद प्रशासन की नींद खुलती है और शिमला पहाड़ी अपनी पुरानी खूबसूरती व सुरक्षा वापस पा पाती है या नहीं।











