कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को आतंकी संगठन ‘ULC’ की धमकी
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत नौकरी कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को एक बार फिर एक कथित आतंकी संगठन ‘ULC’ (यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल) की तरफ से गंभीर धमकी मिली है। पिछले कुछ दिनों में इस तरह की धमकियों का सामने आना घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आइए जानते हैं इस पूरी खबर के खास पहलू…
- 25 दिनों में तीसरी बार धमकी: कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने वाली यह तीसरी बड़ी धमकी है। इससे पहले 7 और 23 अगस्त को भी धमकियां सामने आ चुकी हैं।
- निजी जानकारी लीक: वायरल सूची में कर्मचारियों के नाम, घर के पते, मोबाइल नंबर और वाहनों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां शामिल हैं।
- 4 एंगल से जांच में जुटी एजेंसियां: सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि यह संवेदनशील डेटा लीक कैसे हुआ और इसके पीछे किसका हाथ है।
- ‘ULC’ कनेक्शन की टटोल: जांच एजेंसियां मान रही हैं कि यह कथित संगठन प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा का ही नया चेहरा या नया नेटवर्क हो सकता है।
- आयोग से उच्च स्तरीय जांच की मांग: जम्मू-कश्मीर नेशनल यूनाइटेड फ्रंट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कश्मीर घाटी में एक बार फिर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच डर और चिंता का माहौल है। ताजा मामला 27 अगस्त का है, जब प्रधानमंत्री पैकेज के तहत सेवा दे रहे कर्मचारियों को यूएलसी (ULC) के नाम से धमकी दी गई। सबसे डरावनी बात यह है कि इन धमकियों के साथ सोशल मीडिया पर जो सूचियां वायरल हो रही हैं, उनमें कर्मचारियों के व्यक्तिगत पते और गाड़ियों के नंबर तक दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियां अब कुल 4 प्रमुख एंगल से इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। मुख्य रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि क्या यह डेटा किसी सरकारी रिकॉर्ड से लीक हुआ है या इसके पीछे कोई स्थानीय नेटवर्क सक्रिय है। इसके अलावा, हाल ही में 1990 के दौर के पुराने मामलों को दोबारा खोलने की चल रही कोशिशों के विरोध से भी इस धमकी को जोड़कर देखा जा रहा है।
कर्मचारियों के संगठनों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर सुरक्षा चूक की तुरंत जांच कराई जाए और घाटी में तैनात सभी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को पुख्ता किया जाए।











