तारीखें बदलीं, माफिया नहीं! माइनिंग और पुलिस विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
नूरपुर / पठानकोट: नूरपुर (हिमाचल प्रदेश): प्रदेश के खन्नी पंचायत स्थित ‘ब्राह्मणों दा नाल’ क्षेत्र में अवैध खनन का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तारीखें बदल रही हैं, दिन से रात हो रही है, लेकिन खनन माफिया का दुस्साहस कम होने के बजाय और बढ़ता ही चला जा रहा है। 1 से 5 अगस्त तक लगातार इस अवैध कारोबार के पुख्ता सबूत सामने आने के बावजूद, प्रशासन और खनन विभाग की खामोशी पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आधी रात को भी गरजीं मशीनें, बरसाती मौसम में भी नहीं थमा खेल
हद तो तब हो गई जब 6 अगस्त की आधी रात (12 बजे के करीब) भी बेखौफ खनन माफिया नाले के बीचों-बीच मशीनें चलाता रहा। मानसूनी सीजन में उफनते नालों और नदी-नालों में खनन पर पूरी तरह रोक के बावजूद, यह काला कारोबार किसकी शह पर फल-फूल रहा है, यह जांच का विषय है।
माफिया के बेखौफ अंदाज़ से ऐसा प्रतीत होता है मानो उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन का। लगातार खबरें प्रकाशित होने और वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद भी ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस और सख्त कार्रवाई होती नज़र नहीं आ रही है।
माइनिंग और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में
एक ओर जहाँ खनन (माइनिंग) विभाग पूरी तरह से नींद में सोया हुआ प्रतीत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग की ढिलाई भी साफ़ झलक रही है।
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए जब AMI News की टीम ने 5 और 6 अगस्त को एसपी नूरपुर, इलमा अफ़रोज़ से संपर्क कर उन्हें इस स्थिति से अवगत कराने का प्रयास किया, तो व्यस्तता के कारण उनसे बातचीत नहीं हो सकी।
बड़ा सवाल: > आखिर स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाने में इतनी देरी क्यों कर रहे हैं? > क्या यह महज़ विभागों की लापरवाही है या फिर इसके पीछे खनन माफिया और तंत्र की किसी गहरी मिलीभगत का अंदेशा है?
जनता मांग रही जवाब
1 अगस्त से लगातार जारी इस अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि उफनते नाले में मशीनें उतारकर हादसों को भी खुला न्योता दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों में प्रशासन की इस निष्क्रियता को लेकर भारी रोष है और वे मांग कर रहे हैं कि अवैध खनन में संलिप्त माफिया और जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत व कड़ी कार्रवाई की जाए।














