सीवरेज के खुले ढक्कन दे रहे हादसों को न्योता, नगर निगम बेखबर
ढाकी रोड पर जर्जर हालत, बारिश के मौसम में बढ़ा जानलेवा हादसों का खतरा; स्थानीय निवासियों में भारी रोष
पठानकोट (विशेष प्रतिनिधि): शहर के ढाकी रोड पर सीवरेज के खुले और टूटे हुए ढक्कन आम जनता और वाहन चालकों के लिए जान का जंजाल बने हुए हैं। बारिश के इस मौसम में खुले पड़े ये सीवरेज मैनहोल किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं, लेकिन नगर निगम के आला अधिकारी इस गंभीर समस्या से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं।
‘लावारिस सड़क’ बनी ढाकी रोड
ढाकी रोड पर स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि लोग अब इसे ‘लावारिस रोड’ कहने लगे हैं।
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- सीवरेज का काम अधूरा और शून्य स्तर पर नजर आ रहा है।
- मैनहोल के बड़े-बड़े ढक्कन खोलकर छोड़ दिए गए हैं।
- बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने से यह ढक्कन दिखाई नहीं देते, जिससे स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों की जान हर समय जोखिम में रहती है।
“इस मुख्य सड़क से रोज सैकड़ों बच्चे और लोग गुजरते हैं। यदि कोई बड़ा हादसा हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?” > — रमेश कट्टू (अध्यक्ष, नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन)
प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही उजागर
जब इस समस्या को लेकर सीवरमैन यूनियन और सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की गई, तो उन्होंने नगर निगम के संबंधित जेई (JE) और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए:
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- सीवरमैन यूनियन के प्रतिनिधि (सुनील कुमार): > “हमारे सफाई कर्मचारी सीवरेज की ब्लॉकिंग और सफाई का काम पूरी लगन से कर रहे हैं। लेकिन मेंटेनेंस और नए ढक्कन लगाने का काम ठेकेदारों और जेई साहब का है। ढक्कन खुले होने के कारण कचरा दोबारा सीवरेज में गिर जाता है, जिससे कर्मचारियों को बार-बार परेशानी उठानी पड़ती है। जब तक ठेकेदार ढक्कन बनाकर नहीं देंगे, कर्मचारी क्या करेंगे?”
- यूनियन अध्यक्ष (रमेश कट्टू): > “ढाकी रोड पर लंबे समय से काम लटका हुआ है। यह सीधे तौर पर ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही है। हम कमिश्नर साहब से अपील करते हैं कि वे स्वयं मौके का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द समस्या का समाधान करवाएं।”
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जनता की मांग: कमिश्नर खुद करें दौरा
क्षेत्रीय निवासियों और स्थानीय यूनियनों ने नगर निगम कमिश्नर और प्रशासनिक अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि:
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- अधिकारियों द्वारा ढाकी रोड का तुरंत मौका मुआयना (निरीक्षण) किया जाए।
- सीवरेज के ढक्कनों को प्राथमिकता के आधार पर बंद करवाया जाए।
- लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।











