बचपन से दृष्टिबाधित गगनदीप पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता के निधन के बाद रोजगार की तलाश में भटक रहे पठानकोट के ‘अनसंग हीरो’
पठानकोट के गगनदीप सिंह ने अपनी शारीरिक अक्षमता यानी बचपन से आंखों से देख न पाने की लाचारी को कभी अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने संगीत में अपनी ग्रेजुएशन और एमए की पढ़ाई पूरी की और वे बेहतरीन गायन के साथ-साथ तबला और हारमोनियम वादन में भी पूरी तरह पारंगत हैं। बावजूद इसके, जीवन को एक सकारात्मक अंदाज में जीने वाले गगनदीप के सामने रोजगार का संकट हमेशा से बना रहा है। हाल ही में उनके परिवार पर उस समय एक और बड़ा ब्रजपात हुआ, जब उनके घर में आजीविका का एकमात्र सहारा रहे उनके पिता का 10 अक्टूबर को निधन हो गया। पिता के जाने के बाद अब उनकी माता का सहारा केवल गगनदीप खुद हैं, लेकिन अभी तक उन्हें कोई भी स्थायी रोजगार या नौकरी नहीं मिल पाई है।
रोजगार की इस तलाश में गगनदीप ने प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर कई स्थानीय विधायकों और नेताओं के दरवाजे खटखटाए। उन्होंने अपनी गुहार कई विधायकों जैसे अमित विज, अजय महाजन, विभूति शर्मा और पठानकोट की डीसी मैडम (IAS पलवी मैम) सहित पूर्व के कई अधिकारियों के समक्ष रखी। इन सभी ने उनकी अर्जी और आवेदन तो लिए तथा उन्हें नौकरी दिलाने के बड़े-बड़े आश्वासन भी दिए, लेकिन धरातल पर सिवाय कोरे आश्वासनों के उन्हें कुछ नहीं मिला और हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
महंगाई के इस दौर में केवल नाममात्र के गुजारे से घर चलाना असंभव हो चुका है, जिसके कारण गगनदीप ने एक बार फिर शासन और प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार कोई सरकारी या निजी नौकरी दी जाए। उनका कहना है कि वे अपनी कला और प्रतिभा को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना चाहते हैं ताकि वे अपने परिवार की जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से उठा सकें। इसके साथ ही उन्होंने पठानकोट के स्कूलों और आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को संगीत शिक्षक की आवश्यकता है या कोई उनके घर आकर तबला, हारमोनियम और संगीत की शिक्षा लेना चाहता है, तो वे उनसे संपर्क कर सकता है। अब समय आ गया है कि पठानकोट वासी अपने इस अनसंग हीरो गगनदीप सिंह का संबल बनें और इस संकट की घड़ी में उनकी मदद के लिए आगे आएं।










