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करवा चौथ: सिर्फ लंबी उम्र की दुआ नहीं, अब बराबरी और आपसी सम्मान का भी पर्व

करवा चौथ: सिर्फ लंबी उम्र की दुआ नहीं, अब बराबरी और आपसी सम्मान का भी पर्व

​करवा चौथ का नाम आते ही मन में सजधज कर चांद का इंतजार करती सुहागिनों की तस्वीर उभर आती है। पीढ़ियों से इस पर्व को पति की लंबी उम्र और सलामती के लिए पत्नी के कठोर उपवास के रूप में देखा और निभाया जाता रहा है। लेकिन, बदलते दौर के साथ अब इस परंपरा को देखने का नजरिया भी बदल रहा है। आज सवाल यह उठने लगा है कि जब एक जीवनसंगिनी अपने साथी के सुखी जीवन के लिए भूखी-प्यासी रह सकती है, तो फिर यही कामना पति की ओर से क्यों न हो? क्या दांपत्य जीवन की गाड़ी सिर्फ एक पहिये से चल सकती है?

​भारतीय संस्कृति में करवा चौथ प्यार, समर्पण और अटूट विश्वास का सबसे खूबसूरत प्रतीक है। इसमें कोई दो राय नहीं कि यह पर्व रिश्तों में मिठास घोलता है, लेकिन आज का सामाजिक परिवेश इस बात की मांग करता है कि रिश्ते में दोनों की भावनाओं, इच्छाओं और सेहत को बराबर तवज्जो मिले। शादी केवल एक रस्म या परंपरा नहीं है, बल्कि दो इंसानों की आपसी समझ, साझेदारी और एक-दूसरे का हाथ थामकर उम्र भर चलने का सफर है। ऐसे में एक-दूसरे के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और खुशहाली की दुआ केवल किसी एक पर नहीं, बल्कि दोनों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। पत्नी की आस्था का सम्मान करते हुए उसके त्याग और भावनात्मक योगदान को भी बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए।

​समानता का मतलब यह कतई नहीं है कि हम अपनी पुरानी संस्कृति या परंपराओं को दरकिनार कर दें, बल्कि इसका असली अर्थ यह है कि उन परंपराओं को आपसी समझ और सम्मान के साथ निभाया जाए। उपवास रखना या न रखना पूरी तरह से निजी आस्था का विषय है, और किसी पर भी इसे जबरन थोपना सच्चे प्रेम या समर्पण की निशानी नहीं हो सकता।

​करवा चौथ की असल खूबसूरती तभी निखर कर सामने आती है जब पति और पत्नी दोनों एक-दूसरे के सुखी, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन की कामना करें। छलनी से चांद को देखने और पति का चेहरा निहारने की इस रस्म का दायरा अब सिर्फ पति की लंबी उम्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह दोनों के मजबूत, सुखी और अटूट रिश्ते का प्रतीक बनना चाहिए।

आखिरकार, प्यार तभी मुकम्मल और सार्थक माना जाता है जब उसमें एकतरफा समर्पण के बजाय बराबरी का भाव, अटूट विश्वास और एक-दूसरे के प्रति पूरा सम्मान हो। इस करवा चौथ आइए इस पर्व के मायने को थोड़ा और खूबसूरत बनाएं, जहां साथ निभाने की कसमें दोनों लें और उस सफर में बराबरी का अहसास हमेशा कायम रहे।

Ami News
Author: Ami News

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