पठानकोट के सैली रोड ऑडिटोरियम ग्राउंड में पटाखों की बिक्री से पहले ही खड़े हुए कई सवाल
पठानकोट के सैली रोड स्थित इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के ऑडिटोरियम ग्राउंड में हर साल पटाखों का मेला लगता है। इस ग्राउंड में लोग शौक से पटाखे खरीदने आते हैं, लेकिन इस बार पटाखों की बिक्री शुरू होने से पहले ही कई सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार केवल 7 स्टॉल हैं, जिसके लिए 1200 से 1500 तक के लॉटरी फॉर्म भरे जा चुके हैं। एक-एक व्यक्ति ने कई-कई फॉर्म इस बार भर डाले हैं ताकि प्रोबेबिलिटी बढ़ जाए। रेड क्रॉस के नाम पर कटी इन पर्चियों से एडमिनिस्ट्रेशन के खाते में करीब 25 से 30 लाख रुपए जमा भी हो चुके हैं, यह भी हमें सूत्रों के हवाले से पता लगा है। प्रशासन का फायदा हो रहा है, रेड क्रॉस को फंड मिल रहा है, यहां तक तो सब ठीक है और सवाल यह भी उठता है कि जब इतना भारी रिस्पांस है तो सरकार ओपन ऑक्शन, जिसे खुली बोली कहा जाता है, वह क्यों नहीं करवाती? क्यों सिर्फ लॉटरी के डर्रे पर भी सिस्टम चल रहा है?
असली सवाल पैसों की कमाई के बाद शुरू होता है। दिवाली बीत जाएगी, पटाखे बिक जाएंगे, एडमिनिस्ट्रेशन के पास लाखों रुपए पहुंच जाएंगे, लेकिन पीछे छूट जाएगा कूड़े का विशाल अंबार। पिछले साल ही हमारे चैनल ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद जाकर यहां सफाई हुई थी। लाखों रुपए का एवेन्यू कमाने के बाद क्या एडमिनिस्ट्रेशन की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि इस ग्राउंड की समय पर सफाई करवाई जाए? प्लास्टिक और आतिशबाजी का जहरीला कचरा यहीं पड़ा रहता है और बेजुबान पशु उसे खाने को मजबूर होते हैं।
पैसा जनता का, ग्राउंड सरकारी और मुनाफा लाखों में, तो फिर दिवाली के बाद सफाई का जिम्मा लेने में यह ढील क्यों बरती जाती है? इस बार जब प्रशासन लाखों रुपए इस प्रक्रिया में कमा रहा है, तो हमारी मांग रहेगी और जनता का सवाल सीधा है कि क्या इस बार पटाखों के शोर के बाद सफाई का इंतजाम पहले से ही तय किया जाएगा या फिर हर बार की तरह बेजुबान पशु ही इस लापरवाही का शिकार बनेंगे?










