पठानकोट की प्रसिद्ध लेखिका मीनाक्षी महाजन बसोहली के भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में सम्मानित
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की हसीन वादियों में स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी बसोहली में हाल ही में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘उत्सव-2026’ का शानदार आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में पठानकोट की जानी-मानी लेखिका मीनाक्षी महाजन को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया, जहाँ उनकी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
इस गरिमामयी समारोह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव शुक्ला ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति शुक्ला ने बसोहली के प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के लिए हमें अपनी नदियों और नालों को पूरी तरह साफ रखना होगा। उन्होंने यहाँ की अनूठी संस्कृति और पारंपरिक पहाड़ी शैली की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण पहली बार अटल सेतु पर आयोजित की गई भव्य आरती रही, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने हिस्सा लिया। इस हृदय-स्पर्शी और अलौकिक नजारे ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।
समान्नित होने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए लेखिका मीनाक्षी महाजन ने बताया कि बसोहली का विश्वप्रसिद्ध पश्मीना न केवल अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की आबोहवा और शांति लोगों को आत्मिक सुकून प्रदान करती है। उन्होंने विशेष रूप से याद करते हुए बताया कि चित्रकला और पारंपरिक रामलीला के मंचन में उनके आदरणीय पिता स्वर्गीय मुलख राज गुप्ता का एक अहम और सराहनीय योगदान रहा है, जिससे उन्हें हमेशा प्रेरणा मिलती है।
जिला कठुआ के अंतर्गत आने वाला यह छोटा सा खूबसूरत शहर बसोहली अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए खास पहचान रखता है। इसकी स्थापना वर्ष 1635 में राजा भूपतपाल द्वारा की गई थी। कभी अपने भव्य महलों के लिए प्रसिद्ध रहा यह शहर आज भले ही खंडहरों के रूप में अपनी दास्तां बयां करता हो, लेकिन आज भी यह अपनी अनमोल पहाड़ी चित्रकला और समृद्ध कलात्मक इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
लेखिका मीनाक्षी महाजन ने सरकार और पर्यटन विभाग से पुरजोर अपील करते हुए कहा कि यदि इस ऐतिहासिक शहर की ओर थोड़ा और विशेष ध्यान दिया जाए, तो यहाँ की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक निखारा जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित विकास और संरक्षण मिलने पर बसोहली भारत के मुख्य मानचित्र पर एक अत्यंत खूबसूरत और प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में उभर सकता है, और जो भी पर्यटक यहाँ आएगा, वह यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सकेगा।











