आनंदपुर साहिब हाइडल नहर ओवरफ्लो, भनुपली के गांवों में दहशत; कचरा बना रुकावट

भनुपली (पंजाब)जिले के भनुपली क्षेत्र के आसपास के गांवों में उस समय चिंता और दहशत का माहौल बन गया, जब आनंदपुर साहिब हाइडल नहर का एक हिस्सा भनुपली साइफन के पास अचानक ओवरफ्लो होने लगा। स्थानीय ग्रामीणों ने जब नहर से पानी को तेजी से बाहर निकलते देखा, तो क्षेत्र में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत इसकी सूचना संबंधित उच्च अधिकारियों को दी।

प्लास्टिक और कचरे ने रोका पानी का रास्ता
सूचना मिलते ही पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के सिविल विंग के आला अधिकारी तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गए।
नहर के ओवरफ्लो होने के कारणों पर बात करते हुए PSPCL के कार्यकारी अभियंता (XEN) अविनाश शर्मा ने बताया:
”प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नहर में बहकर आया भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा इस ओवरफ्लो का मुख्य कारण है। प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें और अन्य अपशिष्ट पदार्थ साइफन के पास आकर फंस गए, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया और पानी किनारों से ऊपर बहने लगा।”

हर महीने निकलता है टन कचरा, अधिकारियों ने की अपील
PSPCL के अधिकारियों ने नाराजगी और चिंता जताते हुए कहा कि विभाग द्वारा हर महीने इस नहर से भारी मात्रा में कचरा और मलबा साफ किया जाता है। इसके बावजूद, लोगों द्वारा नहर में लगातार कचरा फेंकने की आदत के कारण यह समस्या बार-बार पैदा हो रही है। अधिकारियों ने स्थानीय जनता और पर्यटकों से अपील की है कि वे नहर के पानी को डंपिंग ग्राउंड न बनाएं और इसमें कचरा फेंकने से बचें।
■ राहत की बात: राहत की बात यह है कि इस घटना से नहर के मुख्य ढांचे (Structure) को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है।
■ वर्तमान स्थिति: PSPCL की टीमें मौके पर लगातार निगरानी रख रही हैं और साइफन से कचरा हटाकर पानी के बहाव को सामान्य करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
राज्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह नहर?
आनंदपुर साहिब हाइडल नहर पंजाब की जलविद्युत (Hydroelectric) परियोजनाओं की रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। राज्य की बिजली आपूर्ति में इसका बहुत बड़ा योगदान है:
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पावर प्रोजेक्ट का नाम |
क्षमता (Megawatt) |
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आनंदपुर साहिब हाइडल प्रोजेक्ट |
100 MW |
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नक्कियां हाइडल प्रोजेक्ट |
100 MW |
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कुल बिजली उत्पादन |
200 MW |
अधिकारियों का कहना है कि यदि इस नहर को कोई बड़ा नुकसान पहुंचता है, तो राज्य की ग्रिड और बिजली आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।







