71 साल बाद गोबिंद सागर झील की होगी ‘डी-सिल्टिंग’, भविष्य में टल सकता है जल संकट और बाढ़ का बड़ा ख़तरा!

बिलासपुर: देश के सबसे महत्वपूर्ण जल विद्युत और सिंचाई स्रोतों में से एक, भाखड़ा बांध पर बने गोबिंद सागर झील के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत की खबर सामने आई है। भविष्य में जल संकट, बाढ़ के खतरे को कम करने और बांध की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से, 71 साल में पहली बार गोबिंद सागर झील की ‘डी-सिल्टिंग’ (गाद निकालने) का काम किया जाएगा।
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि झील में भारी मात्रा में गाद (silt) जमा हो जाने के कारण इसकी जल भंडारण क्षमता काफी कम हो गई है, जिसका सीधा असर देश की कृषि, ऊर्जा सुरक्षा और नदियों के निचले क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण पर पड़ रहा है।

मुख्य बिंदु:
क्षमता पर गंभीर असर: वर्तमान में, गोबिंद सागर झील का 25% हिस्सा गाद (मिट्टी) से भर चुका है। गाद की इस मात्रा ने झील की मूल जल धारण क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।
केंद्र सरकार का कदम: केंद्र सरकार ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए 10 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी डी-सिल्टिंग परियोजना की योजना और कार्यान्वयन पर काम करेगी।
भंडारण क्षमता में कमी: रिपोर्ट के अनुसार, गाद जमा होने के कारण झील की जल भंडारण क्षमता में पहले ही लगभग 19% की कमी आ चुकी है। डी-सिल्टिंग का काम न केवल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करके बाढ़ के प्रकोप को भी कम करने में सहायक होगा।

निष्कर्ष: इस ऐतिहासिक परियोजना से भाखड़ा बांध की भंडारण क्षमता फिर से बढ़ेगी, जिससे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। यह कदम भारत पर मंडरा रहे जल संकट और बाढ़ दोनों के खतरों को महत्वपूर्ण रूप से कम करने में सहायक सिद्ध होगा।








