3.5 करोड़ की रक्षा अनुदान का झांसा देकर हिमाचल का छात्र ठगा गया, धोखे का अहसास होने पर हॉस्टल से गिरा; हालत स्थिर
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक के इंजीनियरिंग पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश कुमार के साथ 3.5 करोड़ रुपये की रक्षा अनुदान (डिफेंस ग्रांट) मिलने के नाम पर एक बड़ा और सुनियोजित साइबर धोखा होने का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र को यह विश्वास दिलाया गया था कि उसके ‘रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)’ नामक डिफेंस इनोवेशन प्रोजेक्ट के लिए ‘डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन’ (DIO) की ‘इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस’ (iDEX) पहल के तहत 3.5 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर हुई है। इस कथित उपलब्धि की खबरें सामने आने के बाद छात्र काफी चर्चा में आ गया था, लेकिन जब डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी कोई ग्रांट मंजूर ही नहीं की गई है, तो धोखाधड़ी का भंडाफोड़ हुआ।
गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक हमीरपुर के प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने इस गंभीर ऑनलाइन धोखाधड़ी के संबंध में अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने आने के तुरंत बाद छात्र बुधवार को अपने हॉस्टल के कमरे से नीचे गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले स्थानीय हमीरपुर अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर (PGIMER) में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 319 और 336(3) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत पहचान की चोरी व साइबर जालसाजी का केस दर्ज किया है।
हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह ने बताया कि जांच अधिकारी छात्र के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों और बातचीत के रिकॉर्ड्स को खंगाल रहे हैं ताकि इस पूरी साजिश के पीछे छिपे अपराधियों तक पहुंचा जा सके। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों, छात्रों, नवप्रवर्तकों और शिक्षण संस्थानों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। पुलिस ने अपील की है कि रक्षा, अनुसंधान या अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी वित्तीय सहायता और ग्रांट के किसी भी दावे या संदेश पर बिना आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग से पुष्टि किए भरोसा न करें।










