फतेहपुर में सफेदे के पेड़ों के कटान पर उठे गंभीर सवाल, बिना प्रॉपर्टी मार्क के हार डिपो पहुंची लकड़ी पर धांधली की आशंका
फतेहपुर में सरकारी अस्पताल और निर्माणाधीन बस स्टैंड के समीप फॉरेस्ट कॉरपोरेशन विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से करवाए गए सफेदे के पेड़ों के कटान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। कटाई स्थल पर पड़ी लकड़ी और ज्वाली स्थित हार डिपो में रखे गए सफेदे के कुछ मोछों पर नियम अनुसार प्रॉपर्टी मार्क नहीं दिखाई दिए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया में धांधली की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर काटे गए पेड़ों की लकड़ी को तुरंत हार डिपो क्यों नहीं भेजा गया। नियमों को ताक पर रखकर लकड़ी कटाई वाले स्थान पर अगले दिन तक लावारिस पड़ी रही, जिससे इस दौरान लकड़ी की पहचान और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
कटान से लेकर डिपो तक लकड़ी पहुंचाए जाने के इस पूरे घटनाक्रम ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं कि क्या सरकारी अस्पताल और बस स्टैंड के पास से काटे गए सभी पेड़ों की लकड़ी हार डिपो में सही सलामत जमा हुई है या नहीं। यह भी जांच का विषय है कि कटाई स्थल से लोड कर भेजी गई लकड़ी और हार डिपो के रिकॉर्ड का पूरा हिसाब-किताब आपस में मेल खाता है या नहीं। इन तमाम सवालों की असल सच्चाई केवल फील्ड बुक, मार्किंग सूची, परिवहन रिकॉर्ड और डिपो रजिस्टर के निष्पक्ष सत्यापन से ही सामने आ सकती है।
जब इस पूरे मामले में फील्ड बुक और लकड़ी पर प्रॉपर्टी मार्क गायब होने को लेकर विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो वे रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और दिखाने में आनाकानी करते दिखे। हद तो तब हो गई जब वन कार्य इकाई के सहायक प्रबंधक ज्ञान सिंह से इस संबंध में सीधे सवाल पूछे गए, तो वे जवाब देने के बजाय मौके से चले गए। अधिकारियों के इस रवैये से मामले में गड़बड़ी की संभावना को और बल मिल रहा है। ऐसे में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी सत्यापन अति आवश्यक है। फॉरेस्ट कॉरपोरेशन विभाग को पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि जांच में कोई भी अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।










