जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त: बच्चों की पढ़ाई ठप, जनप्रतिनिधियों के दावों की खुली पोल
जलभराव की समस्या अब केवल राहगीरों और ग्रामीणों के लिए मुसीबत ही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी ग्रहण लगाने लगी है। मानसून की पहली ही बारिश में क्षेत्र की सड़कों और रास्तों के जलमग्न हो जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है और वे जनप्रतिनिधियों की वादाखिलाफी से बेहद आक्रोषित हैं।
रास्तों में भरा पानी, कई दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
बारिश के कारण क्षेत्र के संपर्क मार्ग पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं, जिससे बच्चे कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे और दावे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
ग्रामीणों की जुबानी, समस्याओं की कहानी
- 5-6 वर्षों से बनी समस्या, पुलिया बंद होने से बिगड़े हालात: > ग़ांव मल्लपुर निवासी नेक राम ने बताया कि जलभराव की समस्या पिछले 5–6 वर्षों से बनी हुई है। पहले शिकायतों के बाद JCB मशीन से अस्थाई रूप से पानी की निकासी कराई जाती थी, लेकिन अब दूसरी तरफ स्थित पुलिया बंद होने के कारण सारा पानी एक ही जगह जमा हो रहा है। इससे बच्चों और राहगीरों के लिए हादसे का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़ी पुलिया को बिना देरी के तुरंत खुलवाया जाए।
- कंधों पर बच्चों को ले जाने को मजबूर अभिभावक: > ग़ांव शेरपुर निवासी पुन्नू राम का कहना है कि पुराने किसानों द्वारा जमीन बेचे जाने के बाद नए मालिकों ने प्राकृतिक जल निकासी का रास्ता बंद कर दिया है। इसके चलते पूरे क्षेत्र का पानी रुक गया है और लगभग 100 से 150 घर जलमग्न हो चुके हैं। लोगों को कमर तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, और छोटे बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए परिजन उन्हें कंधों पर उठाने को मजबूर हैं।
- कमर तक भरा पानी, सांप और जहरीले कीड़ों का डर: > क्षेत्र निवासी संध्या देवी ने बताया कि वह पिछले 10–12 वर्षों से इस विकराल समस्या का सामना कर रही हैं। बरसात के दौरान पानी भरने से सांप और अन्य जहरीले कीड़ों का खतरा लगातार बना रहता है, जिससे हर पल डर के साये में जीना पड़ रहा है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी के बंद पड़े प्राकृतिक रास्तों को तुरंत खुलवाया जाए और पुलिया की सफाई कराकर स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि बच्चों की शिक्षा और लोगों का जनजीवन पटरी पर आ सके।










