सरहदी क्षेत्र में 3 दिन से बिजली ठप, भड़के ग्रामीणों ने नरोट जैमल सिंह पावर हाउस का किया घेराव
* पम्मा, भोला और खड़खड़ा समेत कई गांवों में अंधेरा, बिजली बोर्ड व पंजाब सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
* पीने के पानी की किल्लत, इनवर्टर की बैटरियां भी जवाब दे गईं; भीषण गर्मी में मरीज और बुजुर्ग बेहाल
पठानकोट/नरोट जैमल सिंह: भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे ब्लॉक नरोट जैमल सिंह के अंतर्गत आते कई गांवों में पिछले तीन दिनों से लगातार बिजली सप्लाई ठप रहने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। भीषण गर्मी और अंधेरे से तंग आ चुके दर्जनों ग्रामीणों ने बीती रात नरोट जैमल सिंह स्थित बिजली घर का घेराव कर पंजाब सरकार और बिजली बोर्ड (पावरकॉम) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन व नारेबाजी की।
इनवर्टर ठप, पीने के पानी को तरसे लोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव पम्मा, भोला, खड़खड़ा और इसके आस-पास के अन्य गांवों में पिछले 72 घंटों से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह बंद पड़ी है। बिजली न होने के कारण गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है, क्योंकि बिजली से चलने वाली मोटरें और समरसेबल पूरी तरह बंद हैं। वहीं, लगातार 3 दिन बिजली न आने से घरों में लगे इनवर्टर की बैटरियां भी डिस्चार्ज हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीण भीषण गर्मी में अंधेरे के साए में रातें काटने को मजबूर हैं।
“बिजली न होने से बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। पिछले तीन दिनों से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है, लेकिन विभाग बेखबर बना हुआ है।” > — प्रदर्शनकारी ग्रामीण
पावर हाउस का घेराव कर रखी पक्के समाधान की मांग
समस्या का कोई पक्का समाधान न होने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने बीती रात बड़ी संख्या में एकत्र होकर नरोट जैमल सिंह पावर हाउस का रुख किया। वहां पहुंचकर ग्रामीणों ने पावर हाउस परिसर को घेर लिया और बिजली विभाग व पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- ठप पड़ी बिजली सप्लाई को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाए।
- सीमावर्ती क्षेत्रों में बार-बार होने वाले पावर कट का पक्का व स्थायी समाधान किया जाए।
- भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे संघर्ष को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल अब यह देखना होगा कि बिजली विभाग इस मामले को कितनी संजीदगी से लेता है और प्रभावित गांवों के लोगों को कब तक राहत मिल पाती है।










