फरीदकोट: ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, दो ‘मुन्नाभाई’ गिरफ्तार
जलालाबाद के रहने वाले हैं आरोपी; असली उम्मीदवारों समेत चार पर मामला दर्ज

फरीदकोट : सबऑर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (SSSB), पंजाब द्वारा आयोजित ग्रुप-डी पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान फरीदकोट में जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए एक परीक्षा केंद्र से दो ऐसे व्यक्तियों को काबू किया है, जो असली उम्मीदवारों की जगह फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर परीक्षा दे रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में से एक सरकारी अध्यापक बताया जा रहा है।
बायोमैट्रिक जांच ने खोला राज
जानकारी के अनुसार, रविवार को फरीदकोट के संगत साहिब भाई फेरू खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा शुरू होने से पहले जब बायोमैट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) की प्रक्रिया चल रही थी, तब स्कूल स्टाफ को दो युवकों पर शक हुआ। गहन जांच करने पर पता चला कि उनके बायोमैट्रिक निशान रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे।

नकली आईडी कार्ड से दे रहे थे परीक्षा
पकड़े गए आरोपियों की पहचान जलालाबाद निवासी बलदेव सिंह और सुनील सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि ये दोनों आरोपी जलालाबाद के ही गांव घुबाया निवासी दविंदर सिंह और मंगल सिंह की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। आरोपियों ने इसके लिए बाकायदा फर्जी पहचान पत्र (ID Cards) भी तैयार कर रखे थे ताकि केंद्र के भीतर प्रवेश मिल सके।
अध्यापक निकला मुख्य आरोपी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक सरकारी स्कूल में अध्यापक के पद पर तैनात है। एक जिम्मेदार पद पर होते हुए भी परीक्षा में इस तरह की धोखाधड़ी करने को लेकर विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
“दो व्यक्तियों को दूसरों की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। हमने इन दोनों आरोपियों के साथ-साथ उन असली उम्मीदवारों (दविंदर और मंगल) को भी नामजद किया है, जिन्होंने इन्हें अपनी जगह भेजा था। मामले की गहनता से जांच जारी है।”
— तरलोचन सिंह, डीएसपी, फरीदकोट

पुलिसिया कार्रवाई
बायोमैट्रिक गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद स्कूल स्टाफ ने तुरंत मौके पर मौजूद पुलिस टीम को सूचित किया। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर थाना सिटी में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है और इस सौदेबाजी के लिए कितने रुपयों का लेनदेन हुआ था।








