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“हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: भारी विरोध के बाद एंट्री टैक्स की बढ़ोतरी वापस, पुराने रेट बहाल”

पंजाब-हिमाचल बॉर्डर पर राहत: सुक्खू सरकार ने वापस लिया बढ़ा हुआ एंट्री टैक्स

 

शिमला/चंडीगढ़ :  पंजाब से हिमाचल प्रदेश की ओर रुख करने वाले पर्यटकों और ट्रांसपोर्टरों के लिए राहत भरी खबर है। एंट्री टैक्स (प्रवेश शुल्क) में भारी बढ़ोतरी को लेकर उठे विवाद और चौतरफा विरोध के बाद, हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने कदम पीछे खींच लिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब प्रदेश की सीमाओं पर पुराने रेट ही लागू रहेंगे।

क्यों लिया गया फैसला?

​मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि टैक्स वृद्धि को लेकर जनता और ट्रांसपोर्टरों के बीच काफी गलतफहमियां पैदा हो गई थीं। उन्होंने बताया कि सरकार टोल टैक्स को फास्टैग (FASTag) से जोड़ने की प्रक्रिया पर काम कर रही थी, जिसके कारण गणना में भ्रम की स्थिति बनी। जनता के असंतोष को देखते हुए सरकार ने जनहित में पुरानी दरों को ही बहाल रखने का निर्णय लिया है।

अब कितना लगेगा टैक्स?

​नई व्यवस्था (जो कि अब पुरानी दरों पर आधारित है) के तहत वाहनों से निम्न शुल्क लिया जाएगा:

  • 5 सीटर वाहन: ₹70 (एंट्री टैक्स)
  • 6 से 12 सीटर वाहन: ₹110 (एंट्री टैक्स)

सियासी गलियारों में हलचल: सुक्खू ने पंजाब के नेताओं को दिया भरोसा

​इस मुद्दे की गूंज हिमाचल से ज्यादा पड़ोसी राज्य पंजाब में सुनाई दे रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्वयं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से फोन पर बात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हिमाचल सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जिससे आम लोगों या ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘बैकफुट पर आई सरकार’

​दूसरी ओर, हिमाचल में मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया।

विपक्ष के मुख्य आरोप:

    • ​सरकार ने पहले चोरी-छिपे टैक्स बढ़ाया और अब भारी विरोध और ‘चक्का जाम’ की चेतावनी के डर से पीछे हटी है।
    • ​पेट्रोल-डीजल पर लगाया गया सेस और एंट्री टैक्स जनविरोधी है, जिससे पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है।
    • ​अगर ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर जाते, तो हिमाचल की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती थी।

“सरकार की नीतियों में स्पष्टता का अभाव है। जनता के दबाव में लिया गया यह फैसला सरकार की विफलता को दर्शाता है।”

जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष

निष्कर्ष: फिलहाल बॉर्डर पर स्थिति सामान्य है और ट्रांसपोर्टरों ने टैक्स वापसी के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल पर सेस को लेकर अभी भी खींचतान जारी रहने के आसार हैं।

Ami News
Author: Ami News

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