हिमाचल पर कर्ज का बोझ 1 लाख करोड़ के पार, CAG रिपोर्ट में हुआ खुलासा

शिमला : हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल ऋण देनदारी 10,966 करोड़ रुपये बढ़कर अब 1,03,331.91 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सोमवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 तक राज्य पर कुल 92,365 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो एक साल के भीतर ही 1 लाख करोड़ की सीमा को लांघ गया है।
लेन-देन का लेखा-जोखा
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वित्तीय अवधि के दौरान सरकार ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 26,622 करोड़ रुपये जुटाए। वहीं, दूसरी ओर पुराने ऋणों और अन्य देनदारियों के निपटान के लिए 18,168 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

सार्वजनिक ऋण में भारी उछाल
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं के अनुसार:
- सार्वजनिक ऋण देनदारियां: यह आंकड़ा 8,328.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,842 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें 2,513.53 करोड़ रुपये की सीधी वृद्धि दर्ज की गई है।
- शुद्ध सार्वजनिक ऋण: अप्रैल 2024 में यह 25,363 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 27,777 करोड़ रुपये पर पहुँच गया।
बाजार से लिए गए पुराने कर्ज चुकाने की तैयारी
कैग की रिपोर्ट में उन 10 दीर्घकालिक ऋणों का भी विवरण दिया गया है, जिन्हें चुकाने के लिए अधिसूचना जारी की गई है। ये कर्ज भारी ब्याज दरों पर लिए गए थे। इनका विवरण निम्न प्रकार है:
|
ऋण राशि (करोड़ में) |
ब्याज दर (%) |
|---|---|
|
₹550 |
9.63% |
|
₹200 |
9.23% |
|
₹200 |
8.98% |
|
₹150 |
8.96% |
|
₹150 |
9.00% |
|
₹400 |
8.87% |
|
₹200 |
8.45% |
|
₹100 |
8.26% |
|
₹300 |
8.13% |
|
₹95 |
8.08% |
निष्कर्ष:
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज का यह बढ़ता ग्राफ भविष्य में राज्य के विकास कार्यों और नई योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी चुनौती बन सकता है। उच्च ब्याज दरों वाले ऋणों का भुगतान करना सरकार के लिए अनिवार्य हो गया है ताकि वित्तीय घाटे को नियंत्रित किया जा सके।








