कैग की रिपोर्ट ने खोली ‘ईमानदार’ सरकार की पोल, ‘शीश महल’ के नाम पर जनता के पैसे की लूट: परगट सिंह

जालंधर/चंडीगढ़: पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व सरकारी आवास (06, फ्लैगस्टाफ रोड) के नवीनीकरण को लेकर आई कैग (CAG) रिपोर्ट के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) पर तीखा हमला बोला है। परगट सिंह ने कहा कि खुद को ‘कट्टर ईमानदार’ बताने वाले केजरीवाल और उनकी पार्टी का असली चेहरा अब देश के सामने आ गया है।
342% तक बढ़ी लागत: सरकारी खजाने का दुरुपयोग
परगट सिंह ने कैग रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जिस बंगले, जिसे अब ‘शीश महल’ कहा जा रहा है, के नवीनीकरण के लिए शुरुआत में केवल ₹9.59 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, उसे बढ़ाकर ₹33.66 करोड़ कर दिया गया। यह मूल लागत से 342% अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है और वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है।
”केजरीवाल राजनीति में आने से पहले वीआईपी कल्चर का विरोध करते थे और दो कमरों के मकान में रहने की कसमें खाते थे, लेकिन सत्ता मिलते ही उन्होंने करोड़ों के सरकारी खर्च पर शाही सुख-सुविधाएं जुटाना शुरू कर दिया।” — परगट सिंह

ऑडिट में उजागर हुईं गंभीर अनियमितताएं
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- दिखावे पर फिजूलखर्ची: कुल खर्च में से लगभग ₹18.88 करोड़ केवल उच्च गुणवत्ता वाले स्पेसिफिकेशन, प्राचीन वस्तुओं और सजावटी सामानों पर खर्च किए गए।
- नियमों की अनदेखी: ₹9.34 करोड़ के कार्यों के लिए ‘पोस्ट-फैक्टो’ (काम होने के बाद) मंजूरी ली गई, जो प्रशासनिक प्रक्रिया में भारी चूक को दर्शाता है।
- फंड का हेरफेर: स्टाफ क्वार्टर और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आवंटित धन का उपयोग बंगले की सजावट में किया गया।
पंजाब के बंगले की भी हो कैग जांच
परगट सिंह ने मांग की है कि दिल्ली की तर्ज पर पंजाब में भी केजरीवाल के लिए तैयार करवाए गए सरकारी बंगले की कैग जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब का बंगला भी चर्चा का विषय रहा है और उसमें भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। पंजाब की जनता को यह जानने का हक है कि उनके टैक्स का पैसा कहां और कैसे खर्च किया जा रहा है।

जवाबदेही की मांग
विपक्षी नेताओं ने अब इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार से पूर्ण जवाबदेही और स्पष्टीकरण मांगा है। परगट सिंह ने अंत में कहा कि इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि ‘आप’ सरकार के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और वित्तीय मॉनिटरिंग तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।








