व्यावसायिक एलपीजी वितरण के लिए अब लिखित आवेदन अनिवार्य; होटल-संस्थानों का कोटा तय
खास बातें:
- सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक को देना होगा आवेदन।
- उपायुक्त (DC) की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी आवंटन पर अंतिम फैसला।
- शिक्षण संस्थानों को सबसे अधिक 37% प्राथमिकता, होटलों के लिए 36% कोटा सुरक्षित।

केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने देशभर में व्यावसायिक एलपीजी (LPG) वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और इसकी कालाबाजारी रोकने के लिए नए सख्त दिशा-निर्देश लागू कर दिए हैं। अब शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन, भंडारे और मेलों जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए व्यावसायिक सिलेंडर लेना आसान नहीं होगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक के पास लिखित आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
DC की अध्यक्षता में बनी विशेष कमेटी
प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी और कार्यक्रम के आकार व वास्तविक जरूरत के आधार पर ही सिलेंडरों की संख्या तय करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक गैस की जमाखोरी और दुरुपयोग पर लगाम कसना है।

किसे मिलेगा कितना कोटा?
सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए गैस वितरण का कोटा भी निर्धारित कर दिया है:
| श्रेणी | निर्धारित कोटा (%) |
| :— | :— |
| शिक्षण संस्थान | 37% |
| होटल और रेस्टोरेंट | 36% |
| सामाजिक समारोह/दवा उद्योग/सरकारी कैंटीन | 9% |
| धार्मिक आयोजन | 9% |
बढ़ती मांग पर 20% अतिरिक्त आवंटन की राहत
त्योहारी सीजन और बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने राज्यों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा आवंटित करने की अनुमति दी है। इससे होटल, डेयरी और औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, इस अतिरिक्त कोटे का लाभ उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा जो 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के लिए तेल कंपनियों में पंजीकृत होंगे। पंजीकरण गैस एजेंसी या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।

निगरानी और PNG पर जोर
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक के अनुसार, जो उपभोक्ता लगातार अतिरिक्त गैस की मांग कर रहे हैं, उनके लिए अब पीएनजी (PNG) कनेक्शन हेतु आवेदन करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन अब इस बात की कड़ी निगरानी रखेगा कि व्यावसायिक सिलेंडरों का आवंटन केवल वास्तविक जरूरतों और नियमों के तहत ही हो।








