23 मार्च का दिन भारतीय इतिहास और कैलेंडर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह दिन जहां एक ओर राष्ट्रभक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक जागरूकता और धार्मिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है।

राष्ट्रीय महत्व: शहीद दिवस (सर्वोदय दिवस)
आज का दिन भारत के इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। आज ही के दिन सन 1931 में भारत माता के वीर सपूतों— भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर जेल में फांसी दी गई थी। इन युवा क्रांतिकारियों के बलिदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की लौ को और प्रज्वलित कर दिया था।
पूरा देश आज इन महान नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। इसे ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जो हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी कितनी महंगी कीमत चुकाकर मिली है। कई स्थानों पर आज ‘सर्वोदय दिवस’ के रूप में गांधीवादी मूल्यों और जन-कल्याण के कार्यों का संकल्प भी लिया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय महत्व: विश्व मौसम विज्ञान दिवस
वैश्विक स्तर पर आज ‘विश्व मौसम विज्ञान दिवस’ (World Meteorological Day) मनाया जा रहा है। 23 मार्च 1950 को ‘विश्व मौसम विज्ञान संगठन’ (WMO) की स्थापना हुई थी।
साल 2026 में, जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह दिन और भी प्रासंगिक हो गया है। आज दुनिया भर के वैज्ञानिक और पर्यावरणविद मौसम की सटीक भविष्यवाणी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और पृथ्वी के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने जैसे गंभीर विषयों पर जागरूकता फैला रहे हैं।

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि: चैत्र नवरात्रि की पंचमी
आज धार्मिक दृष्टिकोण से भी बेहद पावन दिन है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आज चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है।
- मां स्कंदमाता का पूजन: आज भक्त मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप ‘मां स्कंदमाता’ की उपासना कर रहे हैं। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
- उपासना का महत्व: मां स्कंदमाता की पूजा में पीले वस्त्र और पीले पुष्पों का विशेष महत्व माना गया है।
आज का पंचांग: एक विस्तृत नजर
आज विक्रम संवत 2082 (नल नाम संवत) के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। पंचांग के मुख्य घटक इस प्रकार हैं:
- तिथि: पंचमी (दोपहर 01:45 बजे तक, इसके बाद षष्ठी प्रारंभ)
- नक्षत्र: रोहिणी (सुबह 10:12 बजे तक, इसके बाद मृगशिरा)
- योग: विष्कुंभ (शाम 04:30 बजे तक, इसके बाद प्रीति योग)
- वार: सोमवार (चंद्रदेव का दिन)
- राहुकाल: सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक (इस समय शुभ कार्यों से बचना चाहिए)
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 से 12:52 बजे तक (शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय)

विशेष टिप: आज सोमवार का दिन और रोहिणी नक्षत्र का संयोग भगवान शिव और चंद्र देव की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी है। सफेद वस्तुओं का दान करना आज शुभ रहेगा।








