पेंशनरों ने घेरा उपायुक्त कार्यालय, बजट में मांगें पूरी न होने पर दी विधानसभा घेराव की चेतावनी

चंबा | जितेंद्र मेहरा । हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आज जिला मुख्यालय चंबा में अपनी लंबित मांगों को लेकर पेंशनरों ने हुंकार भरी। खराब मौसम और बारिश के बावजूद सैकड़ों की संख्या में पेंशनर सड़कों पर उतरे और प्रदेश सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। पेंशनरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी बजट सत्र में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो 30 मार्च को शिमला में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
बारिश के बीच निकाली आक्रोश रैली
पेंशनर वर्ग अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर चौगान नंबर दो में एकत्रित हुए। यहाँ से शुरू हुई आक्रोश रैली पूरे मुख्य बाजार से होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। बाद में, समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

मुख्य मांगें और वित्तीय बकाया
पेंशनरों की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
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- बजटीय प्रावधान: वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में पेंशनरों के लंबित बकाये के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाए।
- एरियर का भुगतान: 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के पेंशन संशोधन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट के एरियर का तुरंत भुगतान।
- डीए की किश्तें: 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) की किश्तें और 146 महीनों का बकाया एरियर जारी करना।
- मेडिकल बिल: पिछले पांच वर्षों से लंबित चिकित्सा बिलों का शीघ्र निपटान।
- ब्याज सहित भुगतान: माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पेंशन मामलों में 6% ब्याज के साथ भुगतान सुनिश्चित करना।
”पेंशनर अपनी जायज मांगों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन दे रही है। यदि सात दिनों के भीतर सरकार ने हमारी बैठक नहीं बुलाई और बजट में ठोस प्रावधान नहीं किए, तो 30 मार्च 2026 को पूरे प्रदेश के पेंशनर शिमला में विधानसभा का घेराव करेंगे।”
— डॉ. डी.के. सोनी, जिला समन्वयक, हिमाचल पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति

30 मार्च को शिमला कूच की तैयारी
समिति के जिला समन्वयक डॉ. डी.के. सोनी ने कहा कि पेंशनर वर्ग सरकार के अड़ियल रवैये से बेहद खफा है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन प्रदेश की सेवा में लगा दिया, लेकिन आज उन्हें अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में विभिन्न विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारी और समिति के सदस्य मौजूद रहे।








