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गैस किल्लत की आहट से पठानकोट में हड़कंप

गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता: एजेंसियों पर भीड़, रेस्टोरेंट कारोबार पर संकट… ESMA के तहत सख्ती की तैयारी”

पठानकोट : AMI NEWS,अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच एलपीजी गैस को लेकर लोगों में चिंता और बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है। शहर की एक गैस एजेंसी पर AMI News की टीम जब पहुंची तो वहां भारी भीड़ देखने को मिली। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मचारियों को तैनात करना पड़ा। आशंका जताई जा रही है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो शहर की अन्य गैस एजेंसियों पर भी इसी प्रकार की भीड़ और अव्यवस्था देखने को मिल सकती है।

सूत्रों के अनुसार गैस सप्लाई को आवश्यक सेवा मानते हुए सरकार ने Essential Services Maintenance Act (ESMA) के तहत गैस एजेंसियों को किसी भी परिस्थिति में सेवा जारी रखने के निर्देश दिए हैं। इस कानून के तहत यदि कोई एजेंसी, कर्मचारी या सप्लायर जानबूझकर सप्लाई बाधित करता है, कृत्रिम कमी पैदा करता है या सेवा देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है।

बताया जा रहा है कि फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य कारोबार के लिए रोक दी गई है, जबकि स्कूलों और अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं को ही कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। यदि यह स्थिति लंबी चली तो इसका सीधा असर रेस्टोरेंट, ढाबों, मिठाई की दुकानों, होटल और छोटे फूड कारोबार पर पड़ सकता है, क्योंकि इनका काम मुख्य रूप से कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर निर्भर करता है। कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई बंद रहने से उनका काम प्रभावित होना तय है।

इधर लोगों में ज्यादा घबराहट का एक कारण यह भी रहा कि पिछले चार दिनों से गैस कंपनियों का ऑनलाइन पोर्टल बंद पड़ा था। इस कारण उपभोक्ता गैस बुक नहीं कर पा रहे थे और एजेंसी संचालक भी, गैस उपलब्ध होने के बावजूद, सिस्टम के जरिए सिलेंडर जारी नहीं कर पा रहे थे। इससे लोगों में यह धारणा बनने लगी कि गैस की भारी कमी हो गई है। हालांकि आज पोर्टल फिर से चालू कर दिया गया है, जिससे बुकिंग और वितरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल सख्त कोटा सिस्टम के तहत एजेंसियों को भेजी जा रही है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर की बुकिंग में करीब 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

ऐसी परिस्थितियों में ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को इस पर कड़ी नजर रखनी होगी ताकि कोई भी व्यक्ति या व्यापारी संकट का फायदा उठाकर सिलेंडरों की कालाबाजारी न कर सके।

इधर बाजार में एक और चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है। गैस की संभावित कमी की खबरों के बीच इंडक्शन और इन्फ्रा (इलेक्ट्रिक) चूल्हों की अचानक कमी हो गई है और इनके दामों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जब AMI News ने एक दुकानदार से इस बारे में बात की तो उसने बताया कि यह कमी निर्माताओं के स्तर पर पैदा की गई है और कीमतें भी वहीं से बढ़ाई गई हैं।

AMI News का मानना है कि संकट के समय देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देना हर नागरिक और कारोबारी का कर्तव्य है। यदि हर व्यक्ति केवल अपने लाभ के बारे में सोचकर आवश्यक वस्तुओं पर मुनाफाखोरी करेगा तो इससे आम जनता की परेशानी और बढ़ेगी। सरकार को चाहिए कि यदि आवश्यक हो तो इंडक्शन और इन्फ्रा चूल्हों के निर्माताओं व सप्लायरों पर भी सख्ती से निगरानी रखे, ताकि कृत्रिम कमी पैदा कर उपभोक्ताओं से मनमाने दाम न वसूले जा सकें।

फिलहाल सरकार लोगों से घबराने के बजाय संयम बरतने की अपील कर रही है और भरोसा दिला रही है कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

AMI NEWS की भी अपील है कि लोग अफवाहों से बचें, जरूरत से ज्यादा गैस जमा न करें और संकट की घड़ी में जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें।

Ami News
Author: Ami News

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