सिद्ध बाबा बालक नाथ की तपोस्थली में चमत्कार: 6 साल बाद मासूम के मुंह से निकली आवाज

शाहतलाई (हमीरपुर): आस्था और विश्वास के संगम, सिद्ध बाबा बालक नाथ की तपोस्थली शाहतलाई में एक बार फिर श्रद्धा का अनूठा चमत्कार देखने को मिला है। जालंधर से आए एक श्रद्धालु परिवार के 6 वर्षीय बेटे, जो जन्म से मूक (बोलने में असमर्थ) था, की जुबान बाबा के आशीर्वाद से खुल गई। मन्नत पूरी होने की खुशी में परिवार ने बाबा के चरणों में चांदी की जीभ अर्पित कर आभार प्रकट किया।
अस्पतालों से मिली थी निराशा, बाबा के दर पर जगी उम्मीद
जालंधर निवासी बच्चे के पिता ने बताया कि उनका बेटा जन्म के बाद से ही एक शब्द भी नहीं बोल पाता था। उन्होंने देश के कई बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञों से बच्चे का इलाज करवाया, लेकिन डॉक्टरों के पास भी इसका कोई पुख्ता समाधान नहीं था। हार मानकर परिवार पिछले साल चैत्र मास के मेलों के दौरान शाहतलाई पहुंचा। वहां उन्होंने मंदिर के पुजारी पंडित श्रवण कुमार शर्मा के माध्यम से विशेष अरदास करवाई और बाबा से बच्चे की आवाज वापस लौटाने की मन्नत मांगी।
11 महीने में हुआ ‘चमत्कार’
परिवार का दावा है कि बाबा बालक नाथ की असीम कृपा से बच्चे ने धीरे-धीरे बोलना शुरू कर दिया। जब बच्चे के मुंह से पहले शब्द निकले, तो परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। मन्नत पूरी होने के ठीक 11 महीने बाद, 21 फरवरी की रात यह परिवार पुनः शाहतलाई पहुंचा।

श्रद्धा की भेंट: अर्पित की चांदी की जीभ
शनिवार रात मंदिर पहुंचे इस परिवार ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और बाबा के दरबार में मन्नत स्वरूप चांदी की जीभ भेंट की। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर में लंगर सेवा भी करवाई।
“बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता। श्रद्धालु ने फोन पर ही खुशखबरी दे दी थी और अब उन्होंने आकर अपनी मन्नत पूरी की है। जो भी भक्त सच्चे मन से अरदास करता है, सिद्ध बाबा उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं।”
— पंडित श्रवण कुमार शर्मा, मंदिर पुजारी

भक्तों के अटूट विश्वास का केंद्र
शाहतलाई वह स्थान है जहां बाबा बालक नाथ ने कठोर तपस्या की थी। विशेषकर पंजाब और उत्तर भारत से लाखों श्रद्धालु यहाँ मन्नत लेकर आते हैं। इस ताजा घटना के बाद इलाके के श्रद्धालुओं में बाबा के प्रति विश्वास और अधिक गहरा हो गया है। आगामी चैत्र मेलों से पहले इस ‘चमत्कार’ की चर्चा पूरे क्षेत्र में है








