पठानकोट के गौरवशाली इतिहास को जीवंत करती सृजल गुप्ता की पुस्तक ‘प्रतिष्ठान प्रॉमिस’ का भव्य विमोचन

सरोवर पोर्टिको में आयोजित समारोह में अमेरिका से आए श्री चामुंडा स्वामी जी ने किया पुस्तक का विमोचन; गणमान्य हस्तियों ने की युवा लेखक के शोध की सराहना

पठानकोट : सदियों पुराने इतिहास और समृद्ध विरासत को समेटे हुए शहर पठानकोट के गौरवशाली अतीत को अब एक नई पहचान मिली है। प्रसिद्ध लेखक और शिक्षाविद सृजल गुप्ता द्वारा लिखित ऐतिहासिक पुस्तक ‘प्रतिष्ठान प्रॉमिस’ का रविवार को स्थानीय होटल सरोवर पोर्टिको में भव्य विमोचन किया गया। इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए शहर की सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक और राजनीतिक हस्तियां बड़ी संख्या में उमड़ीं।

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे श्री चामुंडा स्वामी जी
समारोह के मुख्य अतिथि, अमेरिका से विशेष रूप से पधारे श्री चामुंडा स्वामी जी रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और सृजल गुप्ता की पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। स्वामी जी ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ना ही सच्ची उन्नति है और सृजल ने इस पुस्तक के माध्यम से पठानकोट की मिट्टी का कर्ज चुकाया है।
विभिन्न संस्थाओं ने किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान शहर की प्रमुख संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सृजल गुप्ता को उनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया। वक्ताओं ने कहा कि एक युवा लेखक द्वारा पठानकोट के प्राचीन इतिहास पर इतना गहरा शोध करना काबिले-तारीफ है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि शहर का प्रबुद्ध वर्ग इस मुहिम में लेखक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।

मुगल काल से लेकर अंग्रेजी शासन तक के अनछुए पहलुओं पर चर्चा
विमोचन के उपरांत अपने संबोधन में लेखक सृजल गुप्ता ने पुस्तक के मुख्य अंशों को साझा किया। उन्होंने बताया कि:
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- पठानकोट प्राचीन काल में न केवल एक अभेद्य दुर्ग था, बल्कि व्यापार का एक प्रमुख केंद्र भी रहा है।
- पुस्तक में मुगल शासन, ब्रिटिश राज और स्थानीय राजाओं के पठानकोट से जुड़े गौरवशाली इतिहास को विस्तार से दर्ज किया गया है।
- उन्होंने जोर दिया कि आज की पीढ़ी को यह जानना अनिवार्य है कि जिस मिट्टी पर वे रह रहे हैं, उसका सदियों पहले वैश्विक महत्व क्या था।

“इतिहास का वैभव बनाम वर्तमान की चुनौतियां”
सृजल गुप्ता ने एक गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जो पठानकोट कभी व्यापार और सुखद जीवन शैली में सबसे अग्रणी था, वह आज विकास की दौड़ में पीछे क्यों छूट गया? उन्होंने आह्वान किया कि अपने गौरवशाली भविष्य को संवारने के लिए हमें अपने अतीत के शौर्य को समझना होगा।

सफलता का श्रेय माता-पिता को समर्पित
सृजल गुप्ता ने अपनी इस साहित्यिक यात्रा और सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार की प्रेरणा के बिना इस कठिन शोध कार्य को पूरा करना संभव नहीं था। समारोह का समापन एक नई ऊर्जा और पठानकोट की सेवा के संकल्प के साथ हुआ।








