‘मौत को सामने देखा, डॉक्टर ने कहा था सिर्फ 3 महीने बचे हैं’: युवराज सिंह ने बयां किया कैंसर से जंग का दर्दनाक सच

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े ‘मैच विनर’ और 2011 वर्ल्ड कप के नायक युवराज सिंह ने अपने जीवन के उस काले दौर को याद किया है, जब उन्होंने न केवल अपनी सेहत बल्कि अपनी जिंदगी के लिए भी सबसे बड़ी जंग लड़ी थी। पूर्व ऑलराउंडर ने हाल ही में इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन के शो ‘द स्विच’ (The Switch) पर बातचीत के दौरान बताया कि कैंसर के इलाज के दौरान एक वक्त ऐसा था जब डॉक्टरों ने उन्हें कह दिया था कि उनके पास जीने के लिए केवल तीन से छह महीने का समय बचा है।
मैदान पर खून की उल्टियां, पर देश के लिए नहीं मानी हार
साल 2011 का वर्ल्ड कप हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन युवराज के लिए यह शारीरिक पीड़ा और मानसिक मजबूती की परीक्षा थी। युवराज ने खुलासा किया कि टूर्नामेंट के दौरान उनकी तबीयत काफी खराब थी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और एक मैच के दौरान उन्होंने मैदान पर ही खून की उल्टियां की थीं। युवराज कहते हैं, “जब आपके फेफड़ों और दिल के बीच ट्यूमर हो, तो आप समझ सकते हैं कि क्या गुजरती है। ट्यूमर मेरे दिल की नस को दबा रहा था। डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि अगर कीमोथेरेपी तुरंत शुरू नहीं हुई, तो मुझे हार्ट अटैक आ सकता है।”
टेस्ट क्रिकेट का सपना और मौत का डर
युवराज ने बताया कि जब उन्हें बीमारी का पता चला, उस वक्त वह अपने करियर के चरम पर थे। वह 7 साल तक इंतजार करने और करीब 40 मैचों में 12वें खिलाड़ी रहने के बाद आखिरकार टेस्ट टीम में अपनी जगह पक्की कर रहे थे।
”जब आपसे कहा जाए कि आपके पास सिर्फ 3-6 महीने हैं, तो पहला ख्याल यही आता है कि आप मरने वाले हैं। मैं ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाना चाहता था, मैं खेलना चाहता था, लेकिन हमारे पास इलाज के लिए अमेरिका जाने के अलावा कोई और चारा नहीं था।”
— युवराज सिंह

डॉक्टर इनहोर्न के उन शब्दों ने दी ‘दूसरी जिंदगी’
अमेरिका के इंडियानापोलिस में इलाज के दौरान युवराज मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे। कीमोथेरेपी के दर्दनाक दौर में मशहूर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. लॉरेंस इनहोर्न (Dr. Lawrence Einhorn) की एक बात ने उनमें जान फूंक दी। युवराज ने याद करते हुए कहा, “डॉक्टर ने मुझसे कहा था कि जब तुम यहाँ से बाहर निकलोगे, तो एक ऐसे इंसान बनकर निकलोगे जिसे कभी कैंसर था ही नहीं। उन शब्दों ने मुझे वह मजबूती दी जिसकी मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी।”

वापसी की वो मिसाल: जो आज भी दुनिया को प्रेरित करती है
कैंसर को मात देने के बाद युवराज ने न केवल अपनी जिंदगी जीती, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर भी शानदार वापसी की। उन्होंने 2012 में दोबारा टीम इंडिया की जर्सी पहनी और बाद में इंग्लैंड के खिलाफ 150 रनों की अपनी सर्वश्रेष्ठ वनडे पारी भी खेली। युवराज की यह कहानी आज करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो मौत को भी हराया जा सकता है।








