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पौष पूर्णिमा 2026: क्या 3 जनवरी को लगेगा चंद्र ग्रहण?

पौष पूर्णिमा 2026: क्या 3 जनवरी को लगेगा चंद्र ग्रहण?

​धार्मिक और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 3 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली पौष पूर्णिमा के दिन कोई चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा। यह दिन पूरी तरह से ग्रहण के दोष से मुक्त है।

​अक्सर यह भ्रांति रहती है कि प्रत्येक पूर्णिमा पर ग्रहण की संभावना होती है, क्योंकि चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि को ही घटित होता है। हालांकि, खगोलीय विज्ञान स्पष्ट करता है कि जब तक पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर न पड़े, तब तक ग्रहण नहीं होता। अतः 3 जनवरी को गंगा स्नान, दान-पुण्य और शाकंभरी जयंती के अनुष्ठान बिना किसी सूतक या बाधा के किए जा सकेंगे।

ग्रहण क्यों माना जाता है विशेष: धर्म और विज्ञान का संगम

​हिंदू संस्कृति में ग्रहण को केवल एक घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा के परिवर्तन का समय माना जाता है।

  • धार्मिक पहलू: शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। यही कारण है कि सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भोजन या शुभ कार्यों की मनाही होती है।
  • वैज्ञानिक पहलू: विज्ञान इसे एक सरल खगोलीय संरेखण मानता है। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस प्रकार आती है कि उसकी छाया चंद्रमा को ढक लेती है, तो चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है।

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण: होली पर ‘ब्लड मून’ का साया

​पौष पूर्णिमा भले ही ग्रहण मुक्त हो, लेकिन वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण ज्यादा दूर नहीं है। यह ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा, जो कि होली (होलिका दहन) का दिन है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में ‘ब्लड मून’ के रूप में देखा जाएगा।

भारत में दृश्यता और सूतक काल

​3 मार्च 2026 को होने वाला यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। चूंकि यह भारत में दृश्य होगा, इसलिए इसका सूतक काल और धार्मिक नियम पूरी तरह मान्य रहेंगे। विशेषकर होली के त्योहार के बीच इस ग्रहण का होना ज्योतिषीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जा रहा है।

चंद्र ग्रहण 2026 का समय (नई दिल्ली के अनुसार):

  • चंद्रोदय के साथ ग्रहण का प्रारंभ: शाम 06:26 बजे
  • ग्रहण की समाप्ति: शाम 06:46 बजे
  • सूतक काल प्रारंभ: सुबह 09:39 बजे (ग्रहण से 9 घंटे पहले)
  • सूतक काल समाप्त: शाम 06:46 बजे

पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व

​3 जनवरी 2026 को ग्रहण न होने के कारण श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। इस दिन से ही प्रयागराज में माघ मेले और कल्पवास की शुरुआत होती है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और सूर्य देव के साथ-साथ चंद्र देव की कृपा से मानसिक शांति मिलती है।

​इस दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी और सफेद वस्त्रों का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

Ami News
Author: Ami News

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