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कड़ाके की ठंड में ‘फ्रोजन शोल्डर’ का दर्द: कारण, लक्षण और बचाव

कड़ाके की ठंड में ‘फ्रोजन शोल्डर’ का दर्द: कारण, लक्षण और बचाव

सर्दी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह के दर्द महसूस होने लगते हैं, जिनमें कंधों का दर्द (फ्रोजन शोल्डर) सबसे आम है। हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या लगभग 2-5% लोगों में पाई जाती है और सर्दियों में इसके लक्षण तेज हो जाते हैं तथा मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने लगती है।

​🤷‍♂️ फ्रोजन शोल्डर क्या है?

​फ्रोजन शोल्डर को एडेसिव कैप्सुलाइटिस भी कहा जाता है। यह एक दर्दनाक स्थिति है जिसमें कंधा अकड़ जाता है और हाथ को ऊपर उठाना या पीछे ले जाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

​यह बीमारी आमतौर पर तीन चरणों में होती है:

​1. फ्रीजिंग स्टेज: दर्द बहुत तेज होता है, रात में नींद नहीं आती और धीरे-धीरे अकड़न लगती है।

​2. फ्रोजन स्टेज: दर्द थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन कंधा पूरी तरह जकड़ जाता है, जिससे रोज़मर्रा के काम मुश्किल हो जाते हैं।

​3. थॉइंग स्टेज: धीरे-धीरे हरकत वापस आने लगती है और कंधा फिर से सामान्य होने की ओर बढ़ता है।

​पूरी बीमारी में महीनों से लेकर 1-3 साल तक का समय लग सकता है, इसलिए जल्दी पहचान और इलाज बहुत जरूरी है।

​😥 फ्रोजन शोल्डर क्यों होता है?

​वैज्ञानिक अभी तक पूरी तरह से यह नहीं समझ पाए हैं कि फ्रोजन शोल्डर क्यों होता है। यह स्थिति तब बनती है जब कंधे के जॉइंट कैप्सूल में सूजन आ जाती है, जिससे यह मोटा और सख्त होने लगता है। समय के साथ, कैप्सूल के अंदर एडहेसन्स नाम की मोटी स्कार टिश्यू की पट्टियाँ बन जाती हैं, और जॉइंट को चिकनाई देने वाला साइनोवियल फ्लुइड भी कम हो जाता है। इन बदलावों के कारण कंधे का मूवमेंट सीमित हो जाता है और वह धीरे-धीरे ‘फ्रीज’ होने लगता है।

​🌡️ सर्दियों में समस्या क्यों बढ़ जाती है?

​डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में एयर प्रेशर बदलने के कारण शरीर के सॉफ्ट टिश्यू जैसे लिगामेंट और मांसपेशियां हल्का फैलाव और टाइटनेस दिखाती हैं। इससे कंधे, घुटने और दूसरे जॉइंट्स में तेज दर्द महसूस होता है। ठंड के कारण मांसपेशियां और जॉइंट्स सिकुड़ जाते हैं, ब्लड सर्कुलेशन घट जाता है और लाइफस्टाइल में आने वाली सुस्ती इस जकड़न को गंभीर बना देती है।

​⚠️ फ्रोजन शोल्डर के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

​फ्रोजन शोल्डर आमतौर पर 40-60 वर्ष की उम्र के वयस्कों में देखा जाता है, और महिलाओं में यह जोखिम पुरुषों की तुलना में अधिक होता है।

​जोखिम बढ़ाने वाले अन्य कारक:

​कंधे की हाल की चोट, सर्जरी या कोई ऐसी स्थिति जिसमें कंधे को लंबे समय तक स्थिर रखना पड़ता है।

​कुछ बीमारियाँ:

​डायबिटीज (सबसे बड़ा कारक)

​हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म

​हार्ट डिजीज

​पार्किंसन और स्ट्रोक

​शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक कोई फिजिकल एक्टिविटी न करने से भी मांसपेशियां कठोर बनती हैं, जिससे दर्द और जकड़न बढ़ती है।

Ami News
Author: Ami News

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