यूके का पोस्ट-स्टडी वीजा पर बड़ा यू-टर्न: भारतीय छात्रों को मिलेगा 2 साल का वीजा, जानें पूरा मामला
यूनाइटेड किंगडम (यूके) की सरकार ने वीजा नियमों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण यू-टर्न लेते हुए भारतीय छात्रों के लिए दो साल का पोस्ट-स्टडी वीजा पुनः शुरू करने का फैसला किया है। यह नया नियम आगामी वर्ष के जनवरी महीने से लागू होने जा रहा है। इससे पहले दक्षिणपंथी संगठनों और राजनीतिक दलों के दबाव में यूके सरकार ने इस वीजा की अवधि घटाकर डेढ़ साल (18 महीने) कर दी थी। हालांकि, आर्थिक जरूरतों और भारतीय छात्रों के बड़े योगदान को देखते हुए यूके ने अपनी नीति में यह बदलाव किया है, क्योंकि यूके की नजर भारतीय छात्रों से मिलने वाले लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के विशाल निवेश पर है।
नये शैक्षणिक वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय छात्रों को यूके में पढ़ाई के लिए 82,523 स्टडी वीजा जारी किए गए हैं, जिसके साथ भारत यूके आने वाले विदेशी छात्रों की सूची में दूसरे स्थान पर रहा है। वहीं, 86,368 वीजा के साथ चीन पहले स्थान पर है। हायर एजुकेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट और कपलान इंटरनेशनल पाथवेज़ की एक नई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय छात्रों का यह भारी आगमन यूके के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को आवश्यक वित्तीय सहायता और मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएगा।
यूके द्वारा यह कदम उठाने का एक मुख्य कारण यह भी था कि भारतीय छात्र अब जर्मनी, फ्रांस और यहां तक कि दुबई जैसे अन्य विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे थे, जिससे यूके की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा था। आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या में 150%, फ्रांस में 85% और दुबई में 50% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस कड़े मुकाबले का सामना करने और यूरोपीय देशों को चुनौती देने के उद्देश्य से ही यूके ने भारतीयों के लिए दोबारा दो साल के वीजा की आकर्षक पेशकश की है।
यूके जाने वाले अधिकांश भारतीय छात्र मास्टर डिग्री प्राप्त करने के लिए जाते हैं, लेकिन अब स्नातक (ग्रेजुएट) कार्यक्रमों में भी दाखिला लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल जारी 82,523 वीजा में से लगभग 50% वीजा स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए थे। इसके अलावा, यूके में पढ़ाई कर रहे 75% भारतीय छात्र STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) के क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं, जो यूके के आईटी सेक्टर की प्रगति और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
नये नियमों के साथ-साथ लंदन से बाहर के कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों के लिए वित्तीय शर्तों में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत अब छात्रों को नौ महीनों के लिए अपने बैंक खातों में मौजूद 10,539 पाउंड के मुकाबले 10,827 पाउंड दिखाने की आवश्यकता होगी। वर्तमान समय में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे प्रमुख देश भारतीयों के लिए कमजोर विकल्प साबित हो रहे हैं, क्योंकि कनाडा ने स्टडी वीजा कोटा घटा दिया है, ऑस्ट्रेलिया में कड़े प्रतिबंध हैं और अमेरिका में F-1 वीजा रद्द होने की दर काफी ऊंची है, जहां ट्रंप युग के बाद से भारतीय छात्रों के आगमन में 25% की गिरावट आई है। ऐसे में यूके का यह फैसला भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी राहत और सुनहरा मौका बनकर सामने आया है।










