श्रद्धा के नाम पर नहर में पूजा सामग्री डालना कितना सही?
पठानकोट के बर्फानी मंदिर के पास से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हमें सोचने पर मजबूर करती है। नहर में भगवान की मूर्तियां और पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री पड़ी हुई दिखाई दे रही है। सवाल किसी की आस्था पर उठाने का नहीं, बल्कि इस बात को समझने का है कि पूजा के बाद धार्मिक सामग्री का सही तरीके से निपटारा कैसे किया जाए। आप देख सकते हैं कि नहर में धार्मिक सामग्री पड़ी हुई है।
हम सभी अपने घरों और मंदिरों में भगवान की पूजा करते हैं, उनके प्रति श्रद्धा रखते हैं। लेकिन जब पुरानी मूर्तियों या पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को नहर में डाल दिया जाता है, तो इससे पानी की स्वच्छता और आसपास के वातावरण पर भी असर पड़ सकता है। कई बार लोग परंपरा समझकर ऐसा करते हैं, लेकिन अब जरूरत है कि हम इस विषय पर जागरूक बनें और सही विकल्प अपनाएं।
धार्मिक सामग्री को इधर-उधर या जल स्रोतों में डालने के बजाय मंदिर प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन से जानकारी लेकर उसका उचित निपटारा किया जा सकता है। फूल-मालाओं जैसी सामग्री के लिए भी अलग व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
बर्फानी मंदिर के पास नहर में पड़ी यह धार्मिक सामग्री हम सभी के लिए एक संदेश है। आस्था और श्रद्धा हमारे जीवन का अहम हिस्सा है, लेकिन अपनी आस्था के साथ पर्यावरण को स्वच्छ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। छोटी सी जागरूकता बड़ा बदलाव ला सकती है।
इसलिए आइए, संकल्प लें कि पूजा के बाद धार्मिक सामग्री का निपटारा जिम्मेदारी से करेंगे, न किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे और न ही हमारे जल स्रोत गंदे हों, क्योंकि सच्ची श्रद्धा के साथ जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।











