विकास या केवल प्रचार? सैली रोड पर पार्किंग के नाम पर नई टाइलें लगाने और उद्घाटन को लेकर उठे सवाल
पठानकोट में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के विकास कार्यों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीते दिनों सैली रोड पर थिंड आई हॉस्पिटल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पास जिस जगह का पार्किंग के रूप में औपचारिक उद्घाटन किया गया, वहां पहले से ही वाहन खड़े होते रहे हैं। पहले से ही गाड़ियों की पार्किंग के रूप में इस्तेमाल हो रही इस जगह पर टाइलें बिछाकर और उद्घाटन के पत्थर लगाकर इसे एक नई पार्किंग परियोजना के रूप में पेश किया जा रहा है। इसके अलावा पार्किंग स्थल पर लगाई गई बेंचों पर चेयरमैन का नाम अंकित होने से यह सवाल उठ रहा है कि पठानकोट को वास्तव में बुनियादी सुविधाओं का विकास चाहिए या केवल प्रचार।
स्थानीय नागरिकों और पूर्व चेयरमैन का कहना है कि मुख्य बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग दो-तीन किलोमीटर दूर सैली रोड पर अपनी गाड़ियां खड़ी करके पैदल या ऑटो का अतिरिक्त खर्च उठाकर बाजार नहीं आएंगे। ऐसे में इस स्थान पर नई पार्किंग के नाम पर भारी धनराशि खर्च करने का औचित्य समझ से परे है। इसके विपरीत शहर के बीचों-बीच स्थित वाल्मीकि चौक की लगभग 100 गाड़ियों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग लंबे समय से जलभराव, सीवरेज तथा उचित रखरखाव के अभाव से जूझ रही है। यदि सरकारी फंड का उपयोग नई जगह टाइलें लगाने के स्थान पर इस अंडरग्राउंड पार्किंग को दुरुस्त करने और उसकी बदहाली दूर करने में किया जाता, तो शहरवासियों को वास्तविक सहूलियत मिलती।
इतना ही नहीं, शहर की सड़कों पर करीब 6 से 7 करोड़ रुपये की लागत से दोबारा तारकोल या रिकारपेटिंग बिछाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई जगह सड़कें बनने के 15 दिनों के भीतर ही टूटने लगी हैं। एबीके रोड और आसपास के इलाकों में बरसात के दौरान जलभराव और ड्रेनेज की विकट समस्या बनी हुई है। यदि सड़कों की पूरी रिकारपेटिंग की जगह केवल आवश्यक मरम्मत (पैच वर्क) कराई जाती और बाकी बचे बजट का इस्तेमाल स्ट्रॉम वॉटर ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने में होता, तो बरसात में जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिल सकती थी।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के इस रवैये पर पूर्व मेयर और पूर्व चेयरमैन अनिल वासुदेवा ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के बजाय केवल विज्ञापनों, टाइलें लगाने और बार-बार उद्घाटन के पत्थरों तक सीमित होकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी 40 साल पुरानी टीएमटीए ट्रक्स स्टैंड स्कीम जैसी जमीनी जगहों पर केवल टाइलें बिछाकर नया श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है, जबकि वाल्मीकि चौक की बहुमूल्य पार्किंग प्रोजेक्ट को मेंटेन करने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। पठानकोट की जनता का मानना है कि सरकारी पैसा चेयरमैन या पार्टी का नहीं बल्कि करदाताओं का है, जिसे सिर्फ वाहवाही लूटने के बजाय शहर की वास्तविक समस्याओं को हल करने में खर्च किया जाना चाहिए।












