पराली जलाने की घटनाओं को रोकने खुद खेतों में पहुंचे डिप्टी कमिश्नर आदित्य उप्पल, तुरंत आग बुझाकर किसानों से की यह खास अपील
गुरदासपुर जिले में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। इसी सिलसिले में डिप्टी कमिश्नर आदित्य उप्पल ने खुद जमीन पर उतरकर श्री हरगोबिंदपुर साहिब, कादियां और बटाला इलाके के विभिन्न गांवों का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने एक खेत में पराली में लगी आग देखी, तो वे बिना देर किए तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाई। इसके बाद उन्होंने उपस्थित किसानों से फसल अवशेष न जलाने की भावुक और सख्त अपील की। डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि मशीनरी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई है, और इसके बावजूद यदि कोई नियमों का उल्लंघन कर पराली जलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उनके साथ एसडीएम बटाला सारंगप्रीत सिंह औजला और चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर डॉ. शाहबाज सिंह चीमा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
दौरे के दौरान किसानों से बातचीत करते हुए डिप्टी कमिश्नर आदित्य उप्पल ने उन प्रगतिशील किसानों की सराहना की जो बेलर मशीनों की मदद से पराली की गांठें बनाकर इसका सही निपटारा कर रहे हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इनसे प्रेरणा और मार्गदर्शन लेकर पर्यावरण अनुकूल तरीके अपनाने की सलाह दी। डिप्टी कमिश्नर ने विशेष रूप से यह बात रेखांकित की कि बेलर से गांठें बनाने के बाद खेत में बचे-खुचे अवशेषों को भी आग के हवाले न किया जाए। पराली जलाने से न केवल पर्यावरण गंभीर रूप से प्रदूषित होता है और आम लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि जमीन की उपजाऊ क्षमता भी घटती है। इसलिए किसानों को आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और खेती के लंबे समय तक सुधार को ध्यान में रखते हुए आग लगाने से बचना चाहिए।
जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि पराली प्रबंधन के लिए जरूरी आधुनिक कृषि उपकरण हर गांव तक पहुंचें ताकि किसानों को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। वर्तमान में जिले के सभी एसडीएम, पुलिस अधिकारी, क्लस्टर और नोडल अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद कर रहे हैं और उन्हें उपलब्ध मशीनरी का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर ने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई भी व्यक्ति इन आदेशों की अवहेलना कर फसल अवशेष जलाता पाया गया, तो उस पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में प्रशासन का सहयोग करें और पराली प्रबंधन के सही तरीकों को अपनाएं।











