हिमाचल भाजपा की कांग्रेस को खुली चुनौती: ‘एसआईआर’ पर भ्रम फैलाना बंद करे विपक्ष, मतदाता सूची से नाम हटाने के आरोपों का पेश करे ठोस सबूत
हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को कांग्रेस को देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने के आरोपों का ठोस सबूत देने की खुली चुनौती दी है। हिमाचल भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अनियमितताओं के प्रमाण पेश करने के बजाय इस देशव्यापी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच बेवजह भ्रम फैला रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रियाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और इन पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय तथ्यों, आंकड़ों और सबूतों के आधार पर ही बात होनी चाहिए। प्रारूप सूची से किसी का नाम छूट जाने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया गया है, क्योंकि मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करना हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक अर्थशास्त्री और लेखक के विश्लेषण का हवाला देते हुए विधायक राकेश जमवाल ने कहा कि एसआईआर से जुड़े आंकड़ों और दावों की बारीकी से जांच करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने एक अनुमान का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में लगभग 7.3 करोड़ युवा मतदाता पंजीकृत नहीं हुए थे, इसलिए इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का आकलन करते समय पंजीकरण की इन व्यावहारिक खामियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नामों के चिह्नित होने या गायब होने के दावों का सीधा मतलब यह निकालना गलत है कि उतने नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए हैं। प्रारूप सूची और अंतिम मतदाता सूची में अंतर होता है, जिसमें दावे, आपत्तियां, दस्तावेजों का सत्यापन और सुधार तय कानूनी प्रक्रिया का ही हिस्सा हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि वह स्पष्ट करे कि वास्तव में कितने योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, इन आरोपों का वास्तविक आधार क्या है और इस संबंध में दर्ज शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई है। उन्होंने माना कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना गंभीर विषय है और तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी निष्पक्ष जांच व सुधार होना ही चाहिए। जमवाल ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता सूचियों को लेकर बार-बार बेवजह राजनीतिक विवाद खड़े करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का अधिकार सभी को है, लेकिन अपने आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी भी विपक्ष की ही है।
उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी हर योग्य नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करने और अपात्र, मृत या दोहरे नाम दर्ज होने जैसी गलतियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुधारने की पूरी पक्षधर है। पुनरीक्षण की यह पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनावी प्रक्रियाओं में विश्वास और संस्थागत जवाबदेही बेहद जरूरी है, इसलिए राजनीतिक दलों को जनता के बीच आशंकाएं पैदा करने के बजाय सही जानकारी देने और चुनाव सुधारों पर रचनात्मक चर्चा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।











