मणिकर्ण में फर्जी वसीयत का बड़ा खेल: पूर्व नायब तहसीलदार सहित राजस्व अधिकारियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
- मुख्य आरोपी पर मृत व्यक्ति की जाली वसीयत तैयार कर मकान के कमरों पर कब्जा करने का आरोप
- वर्तमान नायब तहसीलदार, कानूनगो और नंबरदार भी पुलिस की रडार पर, नामजद प्राथमिकी दर्ज
- असली कानूनी वारिस महिला को बिना शामिल किए चुपचाप करवा दिया जमीन का इंतकाल
विशेष संवाददाता / ब्यूरो
भुंतर/कुल्लू:
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल मणिकर्ण में फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक मृत व्यक्ति की कथित तौर पर फर्जी वसीयत तैयार कर करोड़ों की जमीन और मकान हड़पने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार को मुख्य आरोपी बनाया है, जबकि साजिश में कथित संलिप्तता के लिए वर्तमान नायब तहसीलदार, कानूनगो और नंबरदार के खिलाफ भी नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई शिकायतकर्ता महिला पिंकी द्वारा डीएसपी मुख्यालय को सौंपी गई लिखित शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है। पीड़िता पिंकी का आरोप है कि सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार पूर्ण चंद ने उसके दिवंगत मामा हुक्मी राम के नाम की एक जाली वसीयत तैयार की और मणिकर्ण स्थित उनके पुश्तैनी मकान के दो कमरों पर जबरन अवैध कब्जा कर लिया।
शिकायत के मुताबिक, हुक्मी राम अपनी बहन (पिंकी की माता) कलमा देवी और भांजी पिंकी के साथ ही मणिकर्ण में रहते थे। वर्ष 2013 में हुक्मी राम और वर्ष 2023 में कलमा देवी का निधन हो गया था। पिंकी का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2014 में पुराने पुश्तैनी कच्चे मकान की जगह नया मकान बनवाया था।
साजिश के तहत करवाया इंतकाल, नियम ताक पर
आरोप है कि मुख्य आरोपी पूर्ण चंद का मृतक हुक्मी राम के साथ दूर-दूर तक कोई पारिवारिक या खून का रिश्ता नहीं है। इसके बावजूद, बीते अगस्त महीने में आरोपी ने जाली वसीयत के सहारे राजस्व विभाग के अधिकारियों—वर्तमान नायब तहसीलदार, कानूनगो और नंबरदार—के साथ मिलीभगत कर उक्त जमीन का इंतकाल अपने नाम दर्ज करवा लिया।
इस पूरी अवैध प्रक्रिया में मृत व्यक्ति की इकलौती असली कानूनी वारिस (पिंकी) को न तो किसी भी प्रक्रिया में शामिल किया गया और न ही राजस्व विभाग द्वारा उसके बयान दर्ज किए गए, जो कि पूरी तरह से कानून और नियमों के खिलाफ है।
ताले जड़ने और जान से मारने की धमकियां
शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस को बताया कि 16 सितंबर को जब वह अपने परिवार के साथ दूसरे घर (टापरूबाई) गई हुई थी और मणिकर्ण वाला मकान बंद था, तब मुख्य आरोपी ने वहां आकर उनके दोनों कमरों पर जबरन ताले जड़ दिए। महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी अब घर का मालिक बनने का झूठा दावा कर रहा है और उन्हें जान से मारने की धमकियां दे रहा है।
पीड़िता ने यह भी अंदेशा जताया है कि इससे पहले भी आरोपी के इशारे पर अज्ञात लोगों ने उनके घर में चोरी की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें घर से कीमती गहने, बर्तन और कई जरूरी कागजात चुरा लिए गए थे।
पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए मणिकर्ण पुलिस थाने में मुख्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं—धारा 318 (4), 329 (4) और 351 (2)—के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने मामले की गहन छानबीन शुरू कर दी है।
जब इस पूरे मामले पर जरी के वर्तमान नायब तहसीलदार हेमराज शर्मा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस मामले से पूरी तरह अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि “कौन-सा इंतकाल हुआ है, इसकी मुझे फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। मैं अभी अवकाश पर चल रहा हूं। ड्यूटी पर लौटने के बाद मैं रिकॉर्ड की जांच करूंगा और इस अवैध कार्य में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”











