पठानकोट में ईडब्ल्यूएस प्लॉटों पर व्यावसायिक गतिविधियों का खेल—किसकी अनुमति से बदले गए नियम?
पठानकोट: पठानकोट से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सीधे तौर पर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (Improvement Trust) की कार्यप्रणाली और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को अपने आशियाने के लिए उपलब्ध करवाए गए प्लॉटों पर आज दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। यह सवाल सिर्फ अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि यह है कि यह सब किसकी अनुमति और मिलीभगत से हुआ।
मुख्य बिंदु और बड़े सवाल
- मूल उद्देश्य से भटकाव: जिन प्लॉटों का आवंटन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को रहने के लिए किया गया था, वहां आज व्यावसायिक इमारतें और दुकानें खड़ी हैं।
- भूमि उपयोग (Land Use) में बदलाव: यदि ये आवासीय प्लॉट थे, तो यहां कमर्शियल गतिविधि की अनुमति किसने दी? क्या इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने कोई एनओसी (NOC) या मंजूरी जारी की थी?
- मालिकों की सुगबुगाहट: इन प्लॉटों के मूल आवंटियों और वर्तमान मालिकों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यदि प्लॉटों की बिक्री या ट्रांसफर हुआ है, तो वह किस नियम के तहत हुआ।
- सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) का स्पष्ट आदेश और रुख रहा है कि रिहायशी घोषित क्षेत्रों के प्लॉटों पर बिना कानूनी अनुमति और मास्टर प्लान (CLU – Change of Land Use) के कोई भी व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलाई जा सकती। स्थानीय निकायों और ट्रस्टों को सख्त निर्देश हैं कि अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
AMI News इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से पूछता है 5 तीखे सवाल
- इन प्लॉटों की मूल आवंटन शर्तें (Original Allotment Conditions) क्या थीं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
- ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आवंटित इन प्लॉटों को बेचने या ट्रांसफर करने की अनुमति थी या नहीं? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत?
- रिहायशी उद्देश्य के लिए आवंटित इन जमीनों पर कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति किस प्राधिकरण द्वारा दी गई?
- यहां हुए निर्माण के संसक्शन मैप (Sanctioned Maps) और चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
- यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो क्या केवल वर्तमान ऑक्यूपायर्स पर कार्रवाई होगी या उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिनके कार्यकाल में यह सब हुआ?
विभाग की प्रतिक्रिया और आगे की सुगबुगाहट
जब AMI News की टीम ने इस मामले पर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अधिकारियों से बातचीत की, तो उनका कहना था कि संबंधित जगह पर पहला नोटिस भेज दिया गया है और दूसरा नोटिस भी जल्द जारी किया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा और वाजिब सवाल यह उठता है कि ये इमारतें या दुकानें रातों-रात तो खड़ी नहीं हुईं। यह निर्माण लंबे समय से मौजूद है और लगातार जारी है। यदि कार्रवाई का नोटिस अब भेजा जा रहा है, तो इतने लंबे समय से विभाग और वहां तैनात अधिकारी क्या सो रहे थे? क्या पहले किसी को यह अवैध निर्माण नजर नहीं आया या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं?
AMI News इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेगा। हम आवंटन से लेकर वर्तमान ओनरशिप, नक्शों और कमर्शियल इस्तेमाल की अनुमति तक हर एक दस्तावेज की गहराई से पड़ताल कर सच को जनता के सामने रखेगा। क्षेत्र से जुड़ी हर नई अपडेट के लिए देखते रहिए AMI News।












