UPSC के 100 वर्ष पूरे: भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया शताब्दी समारोह का समापन, स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी
नई दिल्ली:
देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा भर्ती संस्था, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी स्थापना के 100 गौरवशाली वर्ष पूरे कर ली हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय शताब्दी समारोह का समापन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और देश को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की प्रशासनिक नींव को मजबूत करने में यूपीएससी के योगदान की सराहना की। इस दौरान उन्होंने यूपीएससी की शताब्दी के प्रतीक के रूप में एक विशेष स्मारक सिक्का और एक डाक टिकट जारी किया। इसके अलावा, आयोग के सफर और नीतियों पर आधारित पुस्तक ‘100 Landmark Judgments – Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ का भी विमोचन किया गया।
यह आयोजन यूपीएससी के साल भर चलने वाले शताब्दी समारोहों का औपचारिक समापन है, जिनकी शुरुआत पिछले साल 1 अक्टूबर को हुई थी। 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को चले इस दो-रोज़ा आयोजन के पहले दिन ‘शताब्दी समारोह – मंथन’ सत्र का आयोजन किया गया था, जिसमें देश भर के शिक्षाविदों, वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न राज्यों के लोक सेवा आयोगों के सदस्यों ने भाग लिया और विभिन्न विषयों पर मंथन किया।
ब्रिटिश भारत में 5 मार्च 1919 के ‘पहले डिस्पैच’ और लॉर्ड ली की अध्यक्षता वाले 1924 के ‘रॉयल कमीशन’ की सिफारिशों के बाद, 1 अक्टूबर 1926 को पहले पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना की गई थी। सर रॉस बार्कर इस संस्था के पहले चेयरमैन बने थे।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत ‘फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन’ के रूप में कार्य करने वाली यह संस्था, 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद अनुच्छेद 315 के तहत पूर्ण संवैधानिक दर्जा प्राप्त कर ‘संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)’ बन गई। वर्तमान में एक चेयरपर्सन और 10 सदस्यों वाली यह संस्था अखिल भारतीय सेवाओं सहित ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ की केंद्रीय सेवाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित करती है तथा सरकार को सीधी भर्ती, पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक मामलों पर सलाह देती है।











