पठानकोट के बलजिंदर सिंह की सऊदी अरब में फंसे होने की दर्दभरी दास्तान: परिवार ने लगाई केंद्र सरकार और पीएम मोदी से गुहार
पठानकोट (पंजाब):पंजाब के पठानकोट जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। पठानकोट के रहने वाले बलजिंदर सिंह, जो पिछले तीन वर्षों से सऊदी अरब में ड्राइवर के रूप में नौकरी कर रहे थे, वहां एक झूठे मामले और कानूनी शिकंजे में फंसकर हिरासत में हैं। परिवार पिछले लंबे समय से उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन अभी तक प्रशासनिक या राजनीतिक स्तर पर कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है।
घटना का पूरा घटनाक्रम और मुख्य बिंदु:
- दवाई का पार्सल और धोखा: बलजिंदर सिंह की पत्नी सुनीलता ने बताया कि उनके पति फरवरी 2024 में जब दुबई से सऊदी अरब जा रहे थे, तब उनके एक साथी ने उन्हें एक छोटा पार्सल (दवाई) यह कहकर थमाया कि यह उसके बीमार पिता के लिए है।
- बॉर्डर पर गिरफ्तारी: सऊदी बॉर्डर पर चेकिंग के दौरान जब उस पार्सल की जाँच की गई, तो उसमें कथित तौर पर कोई नशीला या प्रतिबंधित पदार्थ निकला, जिसके बाद सऊदी पुलिस ने शक के आधार पर बलजिंदर को गिरफ्तार कर लिया।
- नेताओं से गुहार, पर नतीजा सिफर: पीड़ित परिवार ने न्याय पाने के लिए डिप्टी स्पीकर दिनेश सिंह बब्बू, कांग्रेस नेता सुखजिंदर रंधावा, और होशियारपुर के पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना सहित कई स्थानीय व बड़े नेताओं से मुलाकात की है, लेकिन हर जगह से केवल आश्वासन ही मिला है।
- साप्ताहिक बातचीत: बलजिंदर की हफ्ते में एक बार अपने परिवार से फोन पर बात होती है। उनका कहना है कि एंबेसी और स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक इस कानूनी लड़ाई से बाहर निकालने में केवल भारत सरकार ही कूटनीतिक मदद कर सकती है।
परिवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष अपील
बलजिंदर की बेटी सुखन और उनके पूरे परिवार ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से हाथ जोड़कर गुहार लगाई है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें। परिवार का कहना है कि जिस प्रकार पीएम मोदी ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों से जुड़ते हैं, उन्हें पंजाब के इस बेकसूर बेटे की सुध लेनी चाहिए ताकि वह सुरक्षित अपने परिवार के पास लौट सके।
विशेष नोट: इस मामले को लेकर मीडिया और परिजनों की तरफ से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर कोई भी झूठी या भ्रामक खबर वायरल न की जाए। केवल वास्तविक और सत्यापित तथ्यों को ही आगे बढ़ाया जाए ताकि पीड़ित परिवार को और अधिक मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।











