पठानकोट में आवारा मवेशियों का आतंक: प्रशासन की अनदेखी से बढ़ रहे हादसे, लोगों की जान पर संकट
- समस्या का केंद्र: पठानकोट में पटेल चौक से पीर बाबा चौक के बीच सड़कों पर मवेशियों का तांता लगा रहता है।
- बढ़ते हादसे: रात के समय गाड़ियों की रोशनी में मवेशी ठीक से दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन गंभीर सड़क हादसे हो रहे हैं।
- स्थानीय लोगों का दर्द: राहगीरों और दुकानदारों का कहना है कि आवारा पशुओं की टक्कर से कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
- प्रशासन की चुप्पी: मवेशियों की देखरेख और उनके लिए गौशाला जैसी व्यवस्था करने के मामले में प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
विस्तृत विवरण:
पठानकोट के पटेल चौक से पीर बाबा चौक के बीच का मार्ग इन दिनों आवारा पशुओं का अड्डा बन चुका है। यहाँ हर कदम पर मवेशी या तो सड़क पर घूमते नजर आते हैं या फिर बेखौफ बीच रास्ते पर बैठे रहते हैं। इन मवेशियों के कारण लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। रात के समय सड़क पर बैठे या घूम रहे ये जानवर वाहन चालकों को ठीक से दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आए दिन कोई न कोई वाहन इनसे टकरा जाता है, जिससे राहगीरों की जान जोखिम में पड़ती ही है, साथ ही बेकसूर जानवरों की भी बेरहमी से जान चली जाती है।
स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों का भी यही दर्द है। पटेल चौक पर दुकान चलाने वाले अमनदीप सिंह बताते हैं कि लोगों को यहाँ से आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में मून कैंट के पास और कुछ समय पहले एक अन्य घटना में आवारा गाय की वजह से गंभीर एक्सीडेंट हो चुका है, जिसमें लोगों की जान पर बन आती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि इन मवेशियों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित गौशालाओं में भेजा जाए ताकि शहर पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
निष्कर्ष और मांग:
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन बेसहारा जानवरों की सुधि लेने वाला कोई क्यों नहीं है? जब इनके प्रबंधन और गौशालाओं के निर्माण की बात आती है, तो जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन चुप्पी साध लेते हैं। पठानकोट की जनता और नगरवासियों ने जिला प्रशासन तथा नगर निगम से पुरजोर अपील की है कि इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि शहरवासियों और इन मवेशियों की जिंदगी को सुरक्षित बनाया जा सके











