माधोपुर में 200 फीट ऊंचे टावर पर 26 दिनों से डटे दो बुजुर्ग, हालत गंभीर; लिखित आश्वासन मिलने पर ही उतरने की जिद
माधोपुर स्थित डिप्टी कमिश्नर आवास के सामने अपनी मांगों को लेकर 200 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े बैराज औस्ती संघर्ष समिति (जैनी जुगियाल) के 2 बुजुर्गों—कुलविंदर सिंह (81) और शरम सिंह (85) का विरोध प्रदर्शन 26वें दिन में प्रवेश कर गया है। खराब मौसम, तेज बारिश और धूप के बावजूद बुजुर्ग लिखित आश्वासन मिलने से पहले नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं।
प्रशासन द्वारा उन्हें रस्सियों के जरिए भोजन और पानी पहुंचाया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों से अपील की कि वे नीचे आएं ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, हालांकि बुजुर्ग अपनी मांगों पर अड़े रहे और नीचे उतरने से इनकार कर दिया।
इतने दिन बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान न निकलने से टावर पर बैठे दोनों बुजुर्गों की शारीरिक स्थिति नाजुक और गंभीर हो चुकी है। बैराज औस्ती संघर्ष समिति अध्यक्ष दयाल सिंह ने कहा कि कुलविंदर सिंह को सांस लेने में दिक्कत है और शरम सिंह को फिर से बुखार हो चुका है। प्रशासन और सरकार उन्हें नीचे उतारने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है, जिसके चलते हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
समिति के अनुसार, सुजानपुर से तीन बार विधायक रहे दिनेश सिंह बब्बू के कार्यकाल में अवैध रूप से 32 लोगों को रखा गया, जबकि मौजूदा विधायक नरेश पुरी ने टर्मिनेट होने पर अवैध तौर पर रखे गए लोगों का समर्थन किया। समिति का कहना है कि दोनों पक्ष जनता को गुमराह कर रहे हैं।
बराज औस्ती संघर्ष समिति अध्यक्ष दयाल सिंह ने कहा कि 26 दिनों से बुजुर्ग जीवन और मौत से जूझ रहे हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि का बयान तक सामने नहीं आया है। समिति ने जनता से ऐसे नेताओं का सामाजिक बहिष्कार करने का आह्वान किया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और मुख्य इंजीनियर ने भूमि पीड़ितों की जायज मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
संघर्ष कमेटी की मुख्य मांग है कि बिना जांच-पड़ताल के नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों को हटाकर असली बैराज औस्ती संघर्ष समिति के सदस्यों को नौकरी दी जाए क्योंकि शाहपुर कंडी बैराज बांध के निर्माण से पहले इन संघर्ष कर्मियों की जमीन बांध में एक्वायर हुई थी। कमेटी के अनुसार, इस मांग को लेकर उनका संघर्ष वर्ष 2010 से चला आ रहा है और वे पहले भी कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। अब दोनों बुजुर्गों ने आर-पार का संघर्ष शुरू कर दिया है। बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से पुलिस, दमकल विभाग और सेहत विभाग को भी मौके पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।
शरम सिंह इससे पहले मिनी सचिवालय स्थित पानी की टंकी और BSNL के टावर पर चढ़ चुके हैं, वहीं कुलविंदर भी ओवरहेड टंकी और टावर पर चढ़ चुके हैं। करीब दो साल पहले भी दोनों बुजुर्ग इसी टावर पर चढ़े थे। कुल मिलाकर पिछले 5 साल में दोनों बुजुर्ग 13 बार अलग-अलग टंकियों और टावरों पर चढ़ चुके हैं।











