पठानकोट: मॉडल टाउन में सैनी भवन के ध्वस्तीकरण को लेकर हंगामा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार
पठानकोट : पठानकोट के मॉडल टाउन स्थित गुरु नानक पार्क के पास बने सैनी भवन को गिराने पहुँचे प्रशासनिक अमले और निगम अधिकारियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए निगम की टीम पीले पंजे (जेसीबी) के साथ मौके पर पहुँची थी, लेकिन सैनी समाज के सैंकड़ों लोगों और स्थानीय नेताओं के कड़े विरोध के चलते कार्रवाई को फिलहाल टालना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सैनी भवन को लेकर हाईकोर्ट से डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) के आदेश आए थे, क्योंकि यह बिल्डिंग कथित तौर पर अवैध रूप से बनी है और इसमें कुछ वॉयलेशन (नियमों का उल्लंघन) हैं। इसी आदेश के पालन में नगर निगम और प्रशासन की टीमें भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँची थीं।
सैनी समाज का कड़ा विरोध और सुप्रीम कोर्ट का हवाला
कार्रवाई की सूचना मिलते ही सैनी महासभा के प्रधान परमजीत पम्मा, संरक्षक गुरदयाल सिंह सैनी, हल्का इंचार्ज रोहित सियाल और अन्य गणमान्य लोग भारी संख्या में मौके पर एकत्र हो गए।
- सुप्रीम कोर्ट में अपील: नेताओं ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जा चुकी है। जब तक सुप्रीम कोर्ट का कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक इस तरह की जल्दबाजी में की जाने वाली कार्रवाई अनुचित है।
- सामाजिक महत्व: समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि सैनी भवन केवल किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और गरीब परिवारों के कल्याण, धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों के लिए एक मंदिर की तरह है। यहां नाममात्र या मुफ्त दरों पर सामाजिक कार्य होते हैं।
- दोहरे मापदंड का आरोप: समाज के लोगों ने प्रशासन पर सवाल उठाए कि इलाके में अन्य व्यावसायिक इमारतों (जैसे सुशील कप्पी हाउस आदि) पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि सैनी समाज के भवन को निशाना बनाया जा रहा है।
प्रशासन को दी चेतावनी
हल्का इंचार्ज रोहित सियाल और सैनी महासभा के प्रधान ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्दबाजी दिखाने की कोशिश की तो समाज के लोग कड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने लोगों की बात सुनी और फिलहाल स्थिति को शांत करते हुए उच्च स्तर पर चर्चा का भरोसा दिया है।
मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, और अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश पर टिकी हैं।












